Monday, 30 January 2017

भारत की बर्बादी में सबसे बड़ा योगदान किसका ?

भारत ये था... वो था... ऐसा इतिहास था...वो सब ठीक है.. लेकिन आज क्या है ? ?
क्या आपने ध्यान दिया है कि भारत किस वजह से.... किन लोगों की वजह से.... और कब से पिछड़ना शुरू हुआ है ? ? 

जब मुग़ल भारत में आये तो किसलिए आये थे... सोने की चिड़िया कहलाने वाली भारत को लूटने ही आये थे ना... याने 700- 800 साल पहले तक भारत का हरेक आदमी संपन्न तो था ही..

फिर अंग्रेज आ गए... लेकिन वो किसलिए आये थे ? ? ...... उन्होंने भी तो यही सुना था कि भारत सोने की चिड़िया है... मुग़ल लूट रहे हैं ... तो चलो अब हम भी लूटेंगे ... याने अंग्रेज के समय तक भारत में काफी ज्यादा धन था... मुग़ल सैकड़ों सालों तक लूट कर भी अंग्रेजों के आने तक भारत का धन खत्म नहीं कर पाए थे.....

मुग़ल और अंग्रेजों ने जब लूटा तो भारत के लोगोँ के पास से संपत्ति निकल गयी... और इससे भारत गरीब नहीं हुआ, बल्कि भारतीय गरीब होते गए... क्योंकि इसी देश में आपके पैसे जमीन जायदाद उन्होंने हथिया लिए.... भारत अभी भी अमीर था लेकिन भारत में रहने वाले मुग़ल और अंग्रेज अमीर थे... आप नहीं।

लेकिन इसके बाद जब वो लोग गए तब कांग्रेस ने मुसलमानों के साथ मिलकर भारत को ऐसा लूटा... जो हज़ार साल में नहीं हुआ वो हो गया.. भारत ही गरीब हो गया... नदी लूट ली... जमीन का पानी खत्म कर दिया... शुद्ध हवा छीन ली... रहने की जमीन तक नहीं बची... और देश का सारा असल पैसा स्विस बैंक में डाल आये...

1000 सालों के इस लूट में एक बात common है... चाहे जिसने भी .... और जिस काल में भी भारत को लूटा पर मुस्लिम सभी समय उस लूट में शामिल रहे... पहले मुग़लों के साथ (जो कि ये खुद थे)... अंग्रेजों के साथ.. और फिर कांग्रेस सपा बसपा राजद तृण मूल के साथ... और आज भी वो देश लूट रहे हैं... बर्बाद कर रहे हैं... ... अगर आप ऐसे सोचोगे तो समझ आएगा.. कि समस्या कि जड़ में कौन बैठा है ....

इसका इलाज सिर्फ एक हो सकता है... ट्रम्प-नीति.... पहले चरण में ... किसी भी मुस्लिम का देश में आना बंद करो... और दूसरे चरण में सबको बाहर करो... आप देखना अमेरिका में ये दूसरा चरण भी आने वाला है... हाँ ... ट्रम्प के उठाये कदमो से जब अमेरिका को अभूतपूर्व फायदा पहुंचेगा तब दुनिया के सारे गैर मुस्लिम देशों को सोचने और करने पर मजबूर होना ही पड़ेगा।।

Saturday, 28 January 2017

हमें झुकना ना पड़े इसके लिए पद्मावती ने जौहर किया

भाइयों जरा सोचिए.. 16 हज़ार स्त्रियों का जलती आग में प्रवेश कर जाना... ये कितना हृदयविदारक दृश्य रहा होगा... उन सभी स्त्रियों के पति, बच्चे... सारे पुरुष कैसे अपनी माँ बहन आदि को उस तरह से जलते और हमेशा के लिए बिछुड़ते देख पाए होंगे... ? ?
रानी पद्मावती ... नहीं चाहती थीं कि उनके आने वाले हिन्दू बच्चे को कोई मुसलमान ये कह कर चिढ़ाए कि तेरी राजपूत रानी के साथ... हमारे लोगों ने जीतने के बाद बलात्कार किया या हरम में कैद करके रखा....

हमारी माँ पद्मावती ने ऐसा इसलिए किया ताकि हम और आप गर्व से सर उठा कर बोलें कि जान दे दी पर अपने सतीत्व की रक्षा की...

आज संजय लीला भंसाली उस बलिदान का मजाक बनाना चाहते हैं... संजय लीला भंसाली सारे हिंदुओं के मुंह पर कालिख पोतना चाहते हैं... ये आदमी हमसबको मुसलमानों की नजरों में गिराना चाहता है... जानते हैं इस तरह के सीन को.. गाने को .. तस्वीर को... कल होकर मुल्ले सोशल मीडिया में डाल कर हमें अपमानित करेंगे, चिढायेंगे.... और कहेंगे... ये देखो तेरी क्षत्रिय रानी हमारे खिलजी के साथ... गाने गा रही है...

क्या आप बर्दाश्त कर पाएंगे ? जरुरत है कि सारे हिन्दू संगठन इसपर बैठक करें और भारत में कहीं भी इस फिल्म की शूटिंग ना होने दें....

Friday, 27 January 2017

मैंने लिखना क्यों शुरू किया

मैं एक साधारण सा आम आदमी हूँ... किसी भी विषय के पीछे उसका आंकड़ा खोजने नहीं जाता.. न ज्यादा ईस्वी और तारीख निकालने बैठता हु और ना ही बहुत वजनदार शब्दों को जानता हूँ.. मुझे हमेशा से लगता था कि जो सामने हो रहा है अगर उसकी वजह साफ़ है.. आरोपी सामने है तो उसको लिखने और बोलने के लिए इतना ड्रामा क्यों ? सीधा बोलो.. और दैनिक जीवन की जो भाषा आती है उसी में बोलो ताकि वो सबको अपने जैसी लगे...

जब टीवी पर और अखबारों में किसी विषय पर कुछ पढता तो दिमाग भन्ना जाता था.. क्योंकि दस पेज तक विषय की व्याख्या, इतिहास, दोष, फायदे, निदान आदि सब लिखकर भी ये नहीं लिख पाते थे कि इस्लाम ही आतंकवाद है और मुस्लिम ही आतंकवादी होते हैं... वामपंथी याने कंम्यूनिस्ट पार्टी ही नक्सलवादी है... पुलिस ही अपराधियों की सबसे अच्छी दोस्त है और कोर्ट में बैठा जज ही सबसे ज्यादा अन्याय करता है...

पूरा सेमीनार खत्म.. पूरी बैठक खत्म... घंटों चला टीवी का डिबेट भी खत्म.. स्टिंग ऑपरेशन भी खत्म ... पूरा का पूरा 2000 शब्दों का संपादकीय भी खत्म ... और सुनने, देखने , पढ़ने वाले का धैर्य भी खत्म लेकिन उस विषय का निचोड़, रस.. मुख्य आरोपी का कहीं अता पता ही नहीं.... ये देख कर हमेशा सोचता था कि इस विषय पर मैं बोल पाता.. अगर चार लोग भी सुन लेते तो मेरे अंदर का गुबार निकल जाता.. और इन मठाधीशों को औकात दिखा देता...

मुझे पता नहीं था ये मौका सोशल मीडिया से मिलेगा... लेकिन मिला.. दो साल तक पहले दूसरों को पढ़ा. . उनसे सीखा... लेकिन नक़ल नहीं की... खुद से सोचना शुरू किया ... मुझे लगा ये लोग भी बहुत सारे विषय हैं जो छोड़ देते हैं.. जैसे कोई सिर्फ धर्म पर ही लिखता है, कोई राजनीती के ही पीछे पड़ा है.. कोई नास्तिक बना बैठा है... मुझे हर चीज पर बोलना था, समझना था... बताना था... अपनी बात रखनी थी... वास्तव में मैं आम जीवन में इतना कम बोलता हूं कि शायद किसी को यकीन भी ना हो.. लेकिन दिल में तो इतनी बातें थी.. कि बस... कुछ लोग जो फ्रेंडलिस्ट में हैं वो चिढ़ते भी हैं.. कुछ मेरे एक शब्द की गलती पर मौके की ताक में रहते हैं .. ऐसा होता है.. ये ईर्ष्या की भावना.. ये लाइक्स, कमेंट की प्रतिद्वंदिता होती है.. पर मैंने इसके लिए नहीं लिखा... कभी लाइक्स नहीं भी मिले पर मैंने फिर भी पोस्ट हटाया नहीं.. मुझे जो अच्छा लगता है मैं पोस्ट करता हूँ.. आज मैं अपने पोस्ट को फेसबुक में नहीं बल्कि गूगल में सर्च मारता हूँ और वो मिल जाती है... जिनकी आईडी या पेज मैंने सुना तक नहीं... वहाँ भी मेरी वो पोस्ट पड़ी होती है... मुझे इससे ज्यादा क्या चाहिए... कि लोग सच का साथ देते हैं।

Thursday, 26 January 2017

कुछ हिन्दू बहुत जल्दबाजी में हैं..

कुछ हिन्दू बहुत ही जल्दबाजी में हैं.. मोदीजी की सरकार क्या आयी कि सब लोग दो ही साल में भारत से इस्लाम को उखाड़ फेंकना चाहते हैं... राम मंदिर अभी दो तीन महीने में बना लेना चाहते हैं... सबकुछ के लिए बीजेपी को दोषी ठहराने लगते हैं.. तुरंत कश्मीर खाली चाहिए... एकाध हफ्ते में ममता को सूली पर टांग कर बंगाल से सबको बंग्लाद्देश शिफ्ट करना चाहते हैं....

क्या ऐसा संभव है ? मुस्लिम 1947 से अपनी रणनीति पर काम कर तहे हैं तब जाकर कश्मीर , बंगाल, असाम सहित हजारों गाँव मोहल्ले से हिंदुओं को भगा पाये हैं .. और आपने तो अभी दो साल से ही समझना और लड़ना शुरू किया है...

इस दो या तीन साल में ही उनके 70 साल की आधी रणनीतिक विजय को हम लोग बर्बाद कर चुके हैं... राम मंदिर रातों रात नहीं बन सकता.. बाबरी मस्जिद को गिराने में दो से चार घंटे लगे होंगे.. क्या चार या चालीस घंटों में भी राम मंदिर बन जायेगा ? कहने का मतलब उसी तरह घेराबंदी ्करके हमले करते हुए भी नहीं बनाया जा सकेगा.... ये तभी संभव है जब कानूनन इजाजत मिले... इसके लिए राज्य सरकार को कोर्ट में हिंदुओं की तरफ से पैरवी करनी होगी.. कहना होगा कि राज्य की जनता यही चाहती है.. वहाँ पाये गए सारे सबूतों को हिंदुओं के पक्ष में खड़ा करना होगा... क्या ये काम मायावती और अखिलेश करेगा .. ?

ये सब साधारण बात है जो किसी को भी समझ में आती है.. लेकिन जान बूझकर बीजेपी के विरोध में खड़े होकर ये लोग क्या हासिल करना चाहते हैं पता नहीं...

Friday, 20 January 2017

पाकिस्तान नहीं बनता तो हिन्दू समाप्त हो गए होते

कुछ हिंदूवादी इस बात पर बहुत रोते हैं कि भारत का विभाजन हो गया.. पाकिस्तान बन गया.... लेकिन अगर पाकिस्तान नहीं बनता तो क्या आज यहां हिन्दू जीवित होते ? सिर्फ विभाजन को लेकर जब मुसलमानो ने भारत में चारों तरफ दंगे शुरू किये थे तब गली गली में हिंदुओं की लाशें बिछा दी थीं.. (इसमें दलित भी थे)...
कभी सोचा है आपने 1947 से अबतक उनकी जनसंख्या क्या हो गयी होती ? ?
1947 में भी ये बची खुची जनसंख्या ही थी... जो आज मुसीबत बन गयी है...
जब उसी वक़्त विभाजन के पहले इन्होंने अपनी असलियत दिखा दी थी ... लाखों हिंदुओं को मार डाला था.. तो उसी वक़्त हिंदुओं को इतनी दूरदृष्टि हो जानी चाहिए थी कि आगे जा के फिर क्या होने वाला है ? ये तो कहना ही पड़ेगा कि हिन्दू इस मामले में एक मुर्ख संप्रदाय है।

आज वो थोड़े से लोग जब ज्यादा हुए तो कश्मीर लिया, बंगाल लिया, केरल लिया, और यूपी, बिहार की बारी है... ये सच्चाई है, इसको नकारना सच से मुकरना है... ये थोड़े से लोग ? ? लेकिन अगर आज पुरे पाकिस्तान के लोग यहां होते तो ? सारे बड़े आतंकी नेटवर्क भारत में होते, बड़े बड़े डॉन यहीं होते...विश्वप्रसिद्ध आतंकवादी भारत में होते... ना जाने कितने लीडर और शायद pm भी वही होते तो क्या लगता है आपको आज हिन्दू यहां होते ? बचे होते क्या ? मुझे तो नहीं लगता... शायद अस्तित्व खत्म हो गया होता... उसी हाल में होते जैसे पाकिस्तान में हैं.. एक्का दुक्का... याने हिंदुओं का पन्ना खत्म हो गया होता.. अरे आज जब ये थोड़े से बचे हुए मुस्लिम नहीं सम्भलते तो पूरे पाकिस्तान के यहां घुसे होने की स्थिति में क्या होता ? ?

विभाजन गलत था.. लेकिन हिंदुओं के अस्तित्व के लिए एक मौका भी था.. जैसे उधर पाकिस्तान में हिंदुओं को खत्म कर दिया गया वैसे ही इधर हिंदुओं को भी वैसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी... ये मौका था.. बहुत कम उनकी जनसंख्या थी... आजादी के बाद से ही निपटना शुरू करते तो अबतक शायद कहानी खत्म हो गयी होती...

मेरे हिसाब से तो विभाजन हिंदुओं को तात्कालिक रूप से नयी जिंदगी दे गया... और ये मुसलमानों के लिए बड़ी बेवकूफी थी.. क्योंकि अगर उन्होंने विभाजन नहीं किया होता तो आज पूरा भारत उनके हाथों में होता और एक इस्लामिक राष्ट्र होता।

Wednesday, 11 January 2017

मन्त्रों का विज्ञान से नाता है क्या ?

ज्यादातर लोग आजकल मन्त्र तंत्र आदि में विश्वास नहीं करते, इसकी वजह है आज का विज्ञान.. दूसरी वजह है मंत्रो के बारे में  हद से ज्यादा कल्पनातीत कहानियों का बनाया जाना । अब लोगों को लगता है कि अगर मन्त्र से ये होता है तो ये करके दिखाओ, या वो करके दिखाओ या बॉर्डर पर जाकर मन्त्रों से लड़ो आदि आदि।

पहले तो ये कहना अच्छा होगा कि मन्त्रों का प्रयोग हिन्दू(सिख आदि सभी) ही नहीं मुस्लिम और ईसाई के साथ बौद्ध भी करते हैं। खैर, 

कभी आपने सोचा है कि शब्दों से बने कुछ गानों पर आपके अंदर अलग अलग ऊर्जा जागती है या नहीं ? चलो ठीक है रोमांटिक गाने से प्रेम का भाव आता है ? दुःख के गानों से अचानक सबकुछ नीरस सा लगने लगता है ? अच्छा कुछ ऐसे गाने जो आपको पसंद ना हो तो सरदर्द भी करने लगता है और आप चीख पड़ते है कि .. बंद करो ये गाना... पर आपके अंदर इतने तरह की अलग अलग ऊर्जा सिर्फ शब्दों की वजह से क्यों पैदा हो जाती है ? सकारात्मक भी और नकारात्मक भी।

ये सब शब्दों का कमाल होता है,  उस शब्द ने जो ऊर्जा पैदा की है उससे आप प्रभावित होते हैं.. ।। शब्दों को उच्चारण करने से हवा में तरंग बनती है... तरंगों का झुण्ड किस तरफ जायेगा. .. कैसी शक्तियों से मिलेगा ये उस तरंग के प्रकार पर निर्भर है।

ये तो मानते हैं ना कि शब्द जो है वो ध्वनि पैदा करता है... ध्वनि देखा नहीं जाता लेकिन होता है ? ? विज्ञानं ही तो बता रहा हूँ.. तेज ध्वनि में तो इतनी ताकत होती है घरों के शीशे टूट जाते हैं.. कान के परदे फट जाते हैं.. तो क्या आपने देखा कि कान के परदे फाड़ने वाली ध्वनि कैसी थी ? दीखता तो वो अपने इस प्रचंड रूप में भी नहीं है।।

अगर कोई ध्वनि आपके कान के परदे फाड़ सकता है तो आपको बेहोश नहीं कर सकता ? बाजार में "mosquito repeller" नाम से एक यंत्र मिलता है.. उसको लाइए. . घर में लगा दीजिये... उससे एक सीमित मात्रा में एक ख़ास ध्वनि निकलती है जो आपको सुनाई नहीं देगी पर सारे मच्छर भाग जायेंगे... उसको सुनाई पड़ता है और वो बरदाश्त नहीं कर पाता। ध्वनि का प्रभाव है तो.. भई विज्ञान की बात कर रहा हूँ मैं...

मन्त्रों से आपको बेहोश किया जा सकता है.. मन्त्रों से पानी को अलग तरह का बनाया जा सकता है और खाने को भी.. अच्छा और बुरा दोनों... ध्वनि की तरंगें वातावरण के अच्छे और बुरे प्रभाव को सोखती हैं... अपने में मिलाती है या भगा देती है.. या उसकी दिशा मोड़ कर आपके तरफ लाती है किसी दूसरे के ऊपर छोड़ देती है...

ये शून्य.. ये हवा.. कोई रिक्त स्थान नहीं है... आपको दीखता नहीं वो अलग बात है पर उसी रिक्त या अदृश्य या खाली सी जगह .. पर मन्त्र काम करता है क्योंकि आँखों के ना देख पाने की वजह से जिस चीज का उपयोग हम नहीं कर पा रहे उस चीज से हम मन्त्रों के माध्यम से संवाद करते हैं।

बाकी ये सब एक ज्ञान का विषय है कि कौन से शब्द .. कौन सी ध्वनि.. कैसा उच्चारण... होना चाहिए... इसके जानकार कौन हैं... कहाँ है... कितने लोग ऐसे आज बचे हैं... और फिर वही बात है कि इससे सबकुछ नहीं होता , थोड़ा बहुत होता है.. फिर मंत्र है कोई गोली बम नहीं कि उठाया और पटक दिया. .. समय लगता है.. उच्चारण होता है.. उसे साधना पड़ता है ... बाकी तो ऐसा है कि मानो या ना मानो... कोशिश थी विज्ञानं की दृष्टि से समझाने की..

Monday, 9 January 2017

अतिभयंकर सेक्युलर दोस्त को मिली शिक्षा

आज एक भयंकर सेक्युलर दोस्त घर आ गया...
वो बार बार अब्दुल कलाम , अशफाकुल्ला, हमीद आदि की दुहाई दे रहा था... इसने कहा ..
"आखिर कुछ लोग जो अच्छे हैं उनको बाकी गलत मुसलमानों की वजह से तकलीफ क्यों हो ? "

मैंने कहा..
"भई तो जिसके बारे में आप कह रहे हो वो तो आलरेडी मर चुके हैं.. वर्तमान के किसी ऐसे मुस्लिम के बारे में बताओ.."

"वो.. वो.. होगा ही ।। कहीं ना कहीं होगा कोई.. लेकिन कुछ एक दो तो अच्छे हैं ना यार"

"अच्छा तो उस एक दो के चक्कर में बाकि करोडो बुरे लोगों को बर्दाश्त करें..? इस एक दो के चक्कर में बाकियों के हाथों क़त्ल हो जाएं, क्योंकि ये तो बचाएंगे नहीं.. ?

"अरे नहीं.. देखो आपकी बात ठीक है लेकिन एक दो लोग अच्छे भी हैं यार.. "

(दोस्तों इस बीच मैंने उसे अपने यहां खाने पर बुलाया था.. दाल बन चूका था.. एक डब्बे में चावल बहुत समय से रखा था.. उसको निकाला तो देखा कीड़े लगे हुए है.. रंग भी बदल गया था, सड़ गए थे.. )

मैंने वो चावल का डब्बा उतारा और उस दोस्त को दे दिया... और कहा..

"भई ये चावल है ढेर सारा.. इसका बनाओगे क्या चावल आज "?

उसने देखा तो मुझे कहा..
"पागल हो क्या.. ये क्या है सबके सब सड़े हुए, कीड़े लगे.. "

"अरे तो क्या हुआ भाई.. ध्यान से देखो ना उसमे एक दो चावल के दाने में कीड़े नहीं लगा है, साफ़ है.. चढ़ा दो सबको..."

"अबे यार.. एक दो चावल के अच्छे होने से ये चावल खाने लायक नहीं हो जाएगा ना. ये सारा ही घर से बाहर फेंकना पड़ेगा.. ये अच्छे वाले 10 दाने का चावल नहीं बन सकता... समझे..."

मैंने धीरे से कहा..
" वही तो कह रहा हूँ.. समझे .... ?"