Friday, 13 November 2015

भारत से ज्यादा समझदार लोग विदेशों में

दूसरे देशो के लोग जो मोदी जी की भाषा नहीं समझते ..जिनको भाषा भी ट्रांसलेट करनी पड़ती है.. जिस देश के लिए मोदी बाहर से आया एक बाहरी नेता भर है .. भले ही पद कुछ भी हो... परंतु आज वो पूरा देश मोदी जी की दूरदर्शिता.. विद्वता, सज्जनता का कायल हो जाता है... विदेश में तो लोग ये भी सोचते होंगे कि ....... क्या सचमुच में भारत से कोई ऐसा प्रधानमंत्री भी हो सकता है ? क्योंकि आजतक दुनिया को भारत की तरफ से दब्बू और बस फॉर्मेलिटी निभाने वाला पीएम ही देखने को मिला है ...
ऐसे में जबकि विदेश के लोगों को हमारा पीएम अच्छा लगता है तब हमारे ही देश में हमारी मुर्ख जनता को मोदी जी अच्छे नहीं लगते ... दिल्ली में .. बिहार के लोगों को चोर .. लूटेरा अपराधी गतिविधियो वाले लोग पसंद आते हैं ...

अब ऐसे में कोई अच्छा इंसान क्या कर सकता है ... ? अब तो बस यही है कि जो कार्यकाल बचा है उसमे अपने कामों से मोदी जी एक ऐसा मील का पत्थर बना कर छोड़ दें कि आगे किसी भी नेता जैसे राहुल नितीश मुलायम लालू जैसो के लिए उस के पास पहुंचना भी स्वप्न सरीखा हो। क्योंकि आगे हमारी मुफ्तखोर फ्री wi fi और लैपटॉप वाली जनता इनको ही तो सत्ता दिलाएगी ।

महाभारत को पहले क्या कहते थे ?

एक गलत धारणा फैलाई गई कि महाभारत को घर में रखने से गृहकलह होता है। यह गलत धारणा मध्यकाल में फैलाई गई। गीता तो महाभारत का एक हिस्सा है। यदि गीता को पढ़ना है तो महाभारत में से पढ़ना चाहिए।

वेद व्यासजी ने महाभारत को लिखा था।

महाभारत में 1 लाख श्लोक हैं। इन 1 लाख श्लोकों को 100 पर्वों में बांटा गया था। इस ग्रंथ का रचना काल 3100 ईसा पूर्व के लगभग माना जाता है। वेद व्यास के कहने पर शिष्ट वैशम्पायनजी ने इस ग्रंथ को जन्मजेय के यज्ञ समारोह में सुनाया था, तब इस ग्रंथ को 'भारत' कहते थे।

वेद व्यास ने जब इस ग्रंथ को लिखा था, तब इसका नाम 'जय महाकाव्य' रखा था। वेद व्यासजी के कहने से उनके शिष्य वैशम्पायनजी द्वारा जन्मेजय यज्ञ समारोह में इस जय महाकाव्य को ऋषि-मुनियों को सुनाया गया, तब इसे 'भारत' कहा जाने लगा।

मुस्लिम के घोटाले पर जांच असहिष्णुता

सच में ये तो असहिष्णुता है .. धोखाधड़ी करने वालो पर मोदी जी शिकंजा क्यों कस रहे हैं ? ये तो देश में बढ़ता हुआ इनटॉलरेंस है...
देश के अंदर किसी अपराधी पर जो कि मुस्लिम है .. उस पर कार्रवाई करना तो अल्पसंख्यकों पर भयंकर अत्याचार है..
इसका मतलब है देश में साप्रदायिक शक्तियां बढ़ रही है ...
नहीं नहीं .. शारुख को अब पक्का पुरस्कार लौटाना चाहिए ।

बिहार चुनाव के बाद एक और देशद्रोही हुआ प्रसिद्ध

ये है प्रशांत किशोर.. जो आजकल टीवी न्यूज़ चैनल पर छाये हुए हैं ...महर्षि चाणक्य जैसे महान और सम्मानित पुरुष को इस लंपट और देशद्रोही इंसान के साथ तुलना की जा रही है ।
जिसने पैसे के लिए एक सजायाफ्ता अपराधी लालू को सत्ता दिलाने के लिए कार्य किया...

महान चाणक्य ने कुशासन से मुक्ति के लिए एक साधारण से चन्द्रगुप्त के लिए प्रचार किया .. मेहनत किया और सफलता पूर्वक सत्ता का हस्तांतरण सुयोग्य हाथों में किया....पर इस प्रशांत किशोर ने किसके लिए कार्य किया?

जाहिर है इसकी योग्यता चाहे कुछ भी हो .. लेकिन ये इसका उपयोग देश विरोधी कार्य के लिए कर रहा है..चोरों, घोटालेबाजों, भारतीय संस्कृति के विरोधियों के लिए सिर्फ पैसों की वजह से कार्य करना कितना उचित है ? अब वो बंगलादेशी जिहादियो को पनाह देने वाली ममता बनर्जी उर्फ़ मासामा खातुन के लिए बंगाल में कार्य करने जा रहे हैं ....

इस आदमी के पास देशप्रेम नाम की भी कोई चीज़ है या नहीं ... ?कम से कम हम जैसे लोगों को कोई कांग्रेस का समर्थन करने के लिए करोड़ों रुपये दे दे.. तो भी इनकार कर दूंगा ..
देश पहले है और पैसे बाद में ..

क्या है उपनिषद

वेदों का सार हैं उपनिषद। उपनिषद का सार है गीता। उपनिषद वेदों के अंतिम भाग हैं अतः इन्हें वेदांत भी कहते हैं। उपनिषदों में कई रोचक और शिक्षाप्रद कहानियां हैं जिनका संबंध हमारे जीवन से हैं। हालांकि उपनिषद की सच्ची कहानियां तो हमें उपनिषदों में ही पढ़ने को मिलेंगी। उपनिषद लगभग 1008 से भी अधिक हैं। उनमें से भी 108 महत्वपूर्ण हैं और उनमें से भी सबसे महत्वपूर्ण के नाम यहां प्रस्तुत हैं- 1. ईश, 2. केन, 3. कठ, 4. प्रश्न, 5. माण्डूक्य, 7. तैत्तिरीय, 8. ऐतरेय, 9. छान्दोग्य, 10. वृहदारण्यक, 11. नृसिंह पर्व तापनी।

वेद, पुराण, महाभारत, रामायण आदि की कथाएं प्राचीनकाल से लेकर आज तक ज्ञान और प्रेरणा का भंडार रहे हैं लेकिन उनमें भी उपनिषद की कथाएं बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।

उपनिषदों का रचनाकाल : उपनिषद की कथाओं का संकलन वर्तमान में कई लेखकों ने किया है। उन्हें सर्च कर आप उन लेखकों की किताबें खरीद सकते हैं। प्रारंभिक उपनिषदों का रचनाकाल 1000 ईस्वी पूर्व से लेकर 300 ईस्वी पूर्व तक माना गया है। कुछ परवर्ती उपनिषद, जिन पर शंकर ने भाष्य किया, बौद्धकाल के पीछे के हैं और उनका रचनाकाल 400 या 300 ईपू का है। सबसे पुराने उपनिषद वे हैं, जो गद्य में हैं।

बिहारियो के लिए गाली दें या नहीं ?

तीन दिनों से सभी के पोस्ट पर बिहारियो के लिए गाली है..कुछ ये भी कह रहे हैं कि जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए .. उसे गाली मत दो...
कुछ कहते हैं कि कुछ तो वजह होगी तभी बीजेपी को बिहारियों ने वोट नहीं दिया होगा ..

इस पर मेरा कहना यही है कि बिहारियो को जम कर गाली दीजिये .. जो जिसके पात्र हो उसको वही मिलना चाहिए ..
किस बात की इज्जत ? जिसने अपराधियो को वोट दिया ? जिसने पाकिस्तान को ख़ुशी मनाने का मौका दिया? जिसने राक्षस जाति के लोगों को सत्ता दिलाया ?
आज मेरी सारी हमदर्दी बिहारियों से खत्म हो चुकी है .. मैं इस जनादेश का सम्मान नहीं कर सकता .. क्योंकि जनादेश देने वाली जनता मुर्ख है.. जातिवादी है.. धर्म और देश की दुश्मन है...
ऐसे जनादेश की मैं कोई इज्जत नहीं करता.. और ना ऐसी जनता का...

1947 से कांग्रेस का ....वामपंथियो के द्वारा भारत के अंदर जो "पढ़े लिखे मूर्खो "को तैयार करने का तरीका अपनाया गया था वो अब पूरी तरह सफल हो चूका है .. मैं दुखी हूँ कि मैं मूर्खों जाहिलो के देश में रहता हूँ••

हाँ ऐसा ही लग रहा है जैसे मैं अच्छा खासा आदमी किसी पागलों के अस्पताल में जबरदस्ती घुसा दिया गया हूँ...
मैं धर्म को जिन्दा करने की कोशिश कर रहा हूँ पर यहां तो चारों तरफ साले को सब मेन्टल बने घूम रहे हैं ..

बिहार चुनाव के बाद चैनल का बीफ मजाक

अब न्यूज़ चैनल ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका उठाया गया बीफ मुद्दा ही हार की वजह बना.. जबकि सच ये हैं कि दलितों में भी आपको खोजने से ही ऐसा कोई मिलेगा जो गौमांस खाता हो...
लेकिन न्यूज़ चैनल जो हमेशा हिंदुओं के निशाने पर रहते हैं उनपर निशाना लगाने का इससे अच्छा मौका क्या होगा ..

हर चैनल गौमाता का मजाक बनाने में लगा है.. विपक्षी खुल कर गाय के ऊपर गंद कॉमेंट कर रहे हैं ... हालाँकि अब जो होना था हो चूका है .. पर जिन कुछ यूपी के भाई से बात कर रहा हूँ वो सब भयभीत हैं... अब वहाँ भी उनको ऐसे ही  परिणाम का डर है ...

अब समझ नहीं आ रहा क्या क्या कहा जाए .. ? क्यों कहा जाए ? बुराई की अच्छाई पर जीत है.. अपराधियो की शरीफों पर जीत है... इस्लाम की हिंदुत्व पर जीत है...ये भरष्ट मीडिया की भी जीत है... हरेक बुरी ताकतों की जीत है ..