Tuesday, 25 October 2016

जब आडवाणी ने गोली का जवाब गोली से देने की योजना बनायी थी

आडवाणी जब भारत के गृहमंत्री थे, तब उन्होंने इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (इसके बारे में पिछले पोस्ट में बता चुका हूँ) को भारत में अपना जाल फैलाने की इजाज़त दी थी. कहा जाता है कि इसके पीछे पाकिस्तान को तबाह कर जम्मू-कश्मीर को आजाद कराने की आडवाणी की छिपी हुई हसरत काम कर रही थी.
आडवाणी ने न केवल मोसाद को खुली छूट दी बल्कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को अपनी तहकीकात में मिलने वाली पाकिस्तान के खिलाफ सभी सूचनाओं को मोसाद के साथ साझा भी करने का करार किया. बीजेपी सरकार ने एक खास मानसिकता के तहत भारत में इज़रायल की मदद से इस्लामिक आतंकवाद के जवाब में उसी तरह से जवाब देने की कोशिश की. इसके लिए बहुत बड़ा खुफिया जाल इज़रायल और अमरीका के सहयोग से भारत में बिछाया गया.

इस तरह बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत में रॉ, सीआईए और मोसाद का गठजोड़ बना. इस गठजोड़ का आधार ये है कि दोनों देशों का दुश्मन एक ही है. मतलब इस्लामिक आंतकवाद और पाकिस्तान. बीजेपी सरकार ने इज़रायल और अमेरिका के साथ मिल कर आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ स्ट्राइक एंड क्रश यानी हमला करने और कुचलने की नीति बनायी. इस तरह भारत में मोसाद ने अपने पैर जमाने शुरू किये.

भारत की खुफिया एजेंसी और मोसाद के बीच सहयोग बढ़ा. भारत और इज़राइल के बीच इस समझौते के लिए आडवाणी ने गृहमंत्री रहते सन 2000 में इजरायल का दौरा भी किया था.

बताया जाता है कि इसके बाद भारत, इज़रायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और कट्‌टर धार्मिक नेताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू हो गया. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस बैठक में आरएसएस के मुखिया, यहूदियों के मुखिया ने कई बार भाग लिया था जिसके रिकॉर्डिंग मोसाद के पास है।

मोसाद की मदद के लिए सीआईपीयू यानी सेंट्रल इंटेलीजेंस प्रोसेसिंग यूनिट बनाया गया. इसमें आईबी, सीबीआई, बीएसएफ और होम मिनिस्ट्री के उच्च अधिकारी सीधे तौर पर शरीक थे. अपनी योजना को आधिकारिक रूप देने के लिए पिछले दरवाज़े से वर्ल्ड कौंसिल ऑफ रिलीजस लीडर्स का गठन हुआ और हिंदू-यहूदी समिट का सिलसिला शुरू हुआ.

जिस तरह से हिन्दू धर्म की वजह से आरएसएस की स्थापना हुई उसी तरह यहूदी धर्म की वजह से मोसाद का गठन हुआ था।

5-7 फरवरी, 2007 में पहला यहूदी-हिंदू लीडरशिप समिट हुआ. दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में इसका आयोजन किया गया. इसमें हिंदुओं की तरफ संघ से जुड़े और उसके नजदीकी 30 धर्माचार्यों ने हिस्सा लिया. कुल मिलाकर ये आडवाणी थे जिसने इस तरह से आतंकवाद से लड़नी की सोची और एक पूरा प्लान बनाया।

आडवाणी जी ने जिस आक्रमकता से आतंकवाद से निपटने के लिए प्लान तैयार किया था वो सब अगले चुनाव में बीजेपी के हारते ही लहूलुहान हो गया। कांग्रेस अपने आतंकवाद और मुस्लिम प्रेम के लिए ही जानी जाती है। कांग्रेस ने तुरंत भारत में मोसाद को कमजोर किया और बोरिया बिस्तर समेटना को कहा क्योंकि आतंकवाद निपटाने में कई कांग्रेसी जो मुस्लिम नेता थे उनके भी निपटने का खतरा था।

कुल मिलाकर गृहमंत्री आडवाणी जी की सारी मेहनत पर देशवासियों ने गलत वोटिंग करके पानी फेर दिया वरना आज शायद कश्मीर की समस्या का हल हो गया होता और पाकिस्तान भी अपनी औकात में होता। आज फिर से आडवाणी जैसी सोच लेकर ही मोदीजी और राजनाथ आतंकवाद से निपट सकते हैं , आतंकवाद शुद्ध तौर पर धार्मिक आतंकवाद है इसे सेकुलरिज्म और संविधान से नहीं निपटा जा सकता।

Monday, 24 October 2016

दुनिया की खतरनाक खुफिया एजेंसियों के बारे में

किसी देश की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा की सामरिक रणनीति बनाने में खुफिया एजेंसियों का बड़ा हाथ होता है। एक नजर दुनिया की शीर्ष खुफिया एजेंसियों पर-
1. सीआईए, अमेरिका :
दुनिया की सबसे चर्चित और सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियों में शीर्ष पर। स्रोत, संसाधन व अधिकार के लिहाज से बाकी सबसे बहुत आगे। सीआईए की आलोचना इसी बात के लिए भी होती है कि वह सोवियत संघ के पतन का अनुमान नहीं लगा पाई। इसी तरह अमेरिका में 11 सितंबर 2004 के हमलों का कोई पूर्वानुमान नहीं लगा पाई।

2. एसवीआर (तत्कालीन केजीबी), रूस :
सीआईए की बात हो तो केजीबी की बात करना लाजिमी हो ही जाता है। शीतयुद्ध का पूरा दौर इन दो खुफिया एजेंसियों के बीच शह-मात, एजेंट व डबल-एजेंट के खेल के किस्मों से भरा है। ये किस्से कई जासूसी उपन्यासों, फिल्मों और किंवंदतियों के कथानक भी बने।
इसका शुरुआती दौर कामयाबियों से भरा था, चाहे वह एटम बम के बारे में पहले से जानकारी होने का हो या कम्युनिस्ट विरोधियों से पार पाने का। भारत से इसका बहुत करीबी संबंध रहा है। पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन भी केजीबी में काम कर चुके हैं। एसवीआर के पूर्व प्रमुख सर्गेई लेबेदेव ने एक बार कहा था कि इस ग्रह पर कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ केजीबी पहुँची न हो।

3. एमआई 6, ब्रिटेन 
एमआई 6 ब्रिटेन की विदेशी मामलों की खुफिया एजेंसी है, लेकिन ब्रिटेन में एक ज्वॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी (जेआईसी) है जिसके तहत एमआई 6, सिक्योरिटी सर्विस यानी एमआई 5, गवर्नमेंट कम्युनिकेशन हेडक्वार्टर्स (जीसीएचक्यू) और डिफेंस इंटेलिजेंस स्टाफ (डीआईएस) आते हैं। एमआई 6 को मौजूदा दौर की सबसे कुशल खुफिया एजेंसियों में से माना जाता है।
जेम्स बॉण्ड की फिल्में नकली ही सही, लेकिन ब्रिटेन में खुफिया तंत्र की कई कहानियाँ कहती रहीं।
सद्दाम हुसैन के इराक में व्यापक जनसंहार के हथियारों के भंडार होने की जानकारी एमआई 6 की सबसे शर्मनाक नाकामयाबियों में से रही।

4. मोसाद, इसराइल : 
मौजूदा दौर की सबसे कुशल खुफिया एजेंसियों में से एक मोसाद को माना जा सकता है। इसके खाते में भी कामयाबी के कई किस्से जुड़े हैं। बहुत ही क्रूरता से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए मोसाद कुख्यात है।

म्युनिख में 1972 के ओलिम्पिक खेलों में इसराइली एथलीटों की हत्या के बदले में उसने पीएलओ के कई लोगों को पकड़ लिया था। इसके अलावा 1967 में छह दिन के युद्ध से ठीक पहले मिग-21 हासिल करना और फ्रांस से सौदे में खटास पैदा हो जाने के बाद मिराज 5 विमानों की योजना को चुरा लेना इसकी कामयाबियों में शुमार है।
राजनैतिक हत्याओं में उसे महारत हासिल रही है। 

5. चीन की खुफिया एजेंसी : 
पिछले दो दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरी है। इसकी खासियत यह है कि जितनी बारीकी से यह अपने देश के नागरिकों की हर गतिविधि का रिकॉर्ड रखती है, उतना ही मजबूत तंत्र इसका विदेशों में भी है।
चीन की खुफिया एजेंसी के स्लिपर सेल (आम लोगों में अपना असली स्वरूप छिपाकर रहने वाले) दुनिया के कोने-कोने में फैले हुए हैं।

6. डीजीएसई, फ्रांस : 
फ्रांस की इस खुफिया एजेंसी का नाम व चेहरा-मोहरा बाकी चार एजेंसियों जितना प्रभावशाली नहीं रहा। दुनिया में बहुत लोग उसके बारे में इतना जानते नहीं होंगे, लेकिन उसके खाते में कामयाबियाँ कम नहीं हैं। यह वहाँ के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। यही वह एजेंसी है जिसने 1973 के अरब-इसराइल युद्ध के बारे में पूर्व जानकारी सबसे पहले दे दी थी। 1979 में अफगानिस्तान पर सोवियत हमले की जानकारी भी सबसे पहले इसी एजेंसी ने दी थी।
भारत को 43 मिराज 2000 लड़ाकू विमान बेचने में भी इस एजेंसी का बड़ा रोल रहा। प्रशांत महासागर में 1985 में फ्रांस के परमाणु परीक्षण के खिलाफ ग्रीन पीस के विरोध को रोकने की कोशिश में इस एजेंसी ने ऑकलैंड में रैनबो वॉरियर जहाज को डुबो दिया।

7. आईएसआई, पाकिस्तान :
पाकिस्तानी इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेस-इंटेलीजेंस) दुनिया की नंबर एक खुफिया एजेंसी है। अमेरिकी मीडिया क्राइम न्यूज ने 1948 में स्थापित आईएसआई को दुनिया की बेहतरीन और सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी माना है। इसका मुख्यालय इस्लामाबाद के शहराह ए सोहरावर्दी में है। हालांकि, आईएसआई पर आए दिन आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। भारत में हुए कई आतंकी हमलों में आईएसआई के एजेंट्स का हाथ बताया जा रहा है। इसकी एक ताकत जिहादी आतंकी भी भी हैं और पूरे देश का इस्लाम भक्ति भी है। अब अपने मकसद को पूरा करने के लिए आतंकियों का इस्तेमाल कितना सही है और कितना गलत ये तो हम नहीं जानते।

8. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW), भारत
भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) को दुनिया की छठवें नंबर की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी माना गया है। इसकी स्थापना 1968 में की गई थी, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। इस एजेंसी की खासियत यह है कि भारत के प्रधानमंत्री के अलावा किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। रॉ विदेशी मामलों, अपराधियों, आतंकियों के बारे में पूरी जानकारी रखती है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) भी देश की सुरक्षा के लिए काम करती है। इन दोनों एजेंसियों ने मिलकर कई बड़े आतंकी हमलों को नाकाम किया है। मात्र तीन वर्षों में ही एजेंसी ने एक नए राष्ट्र (बांग्लादेश) के गठन में अहम भूमिका निभाई। भारत ने 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध से कई सबक सीखे। इसी की जानकारी के आधार पर, नौसेना कमांडो ने चटगांव बंदरगाह पर मौजूद पाकिस्तान के जहाजों को उड़ा दिया था।
इधर के 30 सालों में इसे शायद कमजोर कर दिया गया।

Sunday, 23 October 2016

मेरे गाँव की क्रिकेट लाइफ

अब तो क्या रविवार और क्या सोमवार.. हर दिन एक ही जैसा है। स्कूल के दिनों में जरूर शनिवार और रविवार का इंतज़ार होता था। 10 बजे से स्कूल शुरू होता और 4 बजे तक चलता फिर आधे घंटे में जल्दी से घर जाता और बैट बॉल निकाल दो घंटे के लिए मैदान में।
स्कूल से कॉलेज में गया.. समय बीतता गया मगर क्रिकेट नहीं छूटा... हाँ बीच में मार्शल आर्ट सीखने का समय आया तो इस दौरान 7 साल के लिए क्रिकेट छूट गया। 7 साल बाद जब यूँही वापिस एक दिन क्रिकेट खेलने को मिला तो पहली बार टेनिस बॉल से खेला.. कौर्केट बॉल, ड्यूज बॉल आदि का ज़माना जा चूका था। टेनिस बॉल के आने से खेल भी बदल गया था अब ग्रोउंडेड शॉट नहीं बल्कि उड़ा के मारने वाला ही अच्छा खिलाडी था।
सुबह में अगर आप 6 से 9 खेल ही लेते हैं तो क्या जाता है? फिटनेस खिलाडियों वाली बनी रहती है।
मैं भी खेलता था सुबह में। एक टीम थी जिसमे ज्यादातर व्यापारी लोग थे, 9 बजे लौट जाते हैं फिर नहा धोकर 11 बजे तक दूकान खोल देते हैं।
हाँ तो मुझे टेनिस बॉल से खेलने में बड़ी परेशानी आयी मैं उसे ग्रोउंडेड शॉट मारता था पर जल्दी ही खेल को बदल लिया.. दुबला पतला तो था लेकिन मार्शल आर्ट से कलाई और कंधे के अंदर जो ताकत आयी थी वो यहाँ पता चला... जब मेरे लगाए शॉट मैदान के बाहर गिरने लगे।

रविवार को मैच खेलते थे.. मेरा डाउन था 3rd या 4th...  एक दो बार नहीं बल्कि कई बार ऐसी पारियां खेली और मैच जिता कर दिया था कि सभी मेरे फैन थे, और आप जिसके खिलाफ खेलते हैं वो भी फैन हो जाते हैं धीरे धीरे शहर और उससे बाहर भी सभी जानने लग गए। ऐसे कई किस्से हैं क्रिकेट के जो यादगार हो गए। एक बार यूँही खेलते हुए इतने सार छक्के मार दिए कि खेल के बाद मेरे एक दोस्त ने कहा.. क्या भाई तुमने तो भीड़ लगा दी.. उधर देख .. सारे लोग अपना खेल छोड़ तेरी बैटिंग देख रहे हैं...
टीम में अगर मैच के दौरान अगर 2 या तीन विकेट जल्दी गिर जाते तो सभी यही कहते कि "तो क्या हुआ अभी समीर भैया तो हैं ना ".... लेकिन मैं आम आदमी ही था ऐसे हालात में हालत खराब होती थी लेकिन ऐसे ही हालात में अच्छा खेलने की वजह से तो सभी को इतना विश्वास था।
चूँकि शहर के सभी क्रिकेट खेलने वाले अब जान ही चुके थे तो मैच में सबका टारगेट मैं ही रहता था.. कि बस इनको आउट कर दो और मैच जीत लो... 
लेकिन ये क्रिकेट है कभी कभी जल्दी भी आउट होता, मैच भी नहीं जीतते.. लेकिन ज्यादातर मौकों पर मैंने वन मैन आर्मी की तरह मैच जितायी थी।
मुझसे सब इसलिए परेशां थे कि चाहे ऑफ साइड में बॉल दो या फ्रंट साइड में या लेग साइड ... कहीं से समस्या नहीं थी।
एक टूर्नामेंट ऐसा भी था जहां मेरी टीम हारती गयी और मैं मैन ऑफ द मैच का पुरुस्कार फिर भी लेता गया।
एक बार एक मुल्ले की टीम से मैच खेल रहा था, एक मुस्लिम से थे सारे.. इतना धोया कि उसका मुल्ला कप्तान अपने गेंदबाज पर झल्लाने लगा.. आखिर में गेंदबाज और कप्तान में ही लड़ाई हो गयी.. गेंदबाज ने कहा कि हर तरह की हरेक साइड गेंद फेंक चूका हूँ.. और क्या करूँगा..जिधर गेंद फेंकता हूँ बाउंडरी मार देता है , ज्यादा समझता है तो खुद बॉल कर ले ?

किस्से हैं... कहानी है.. वो भी अनंत... .. शायद आप सभी के भी होंगे अगर क्रिकेट खेल होंगे.. हर बार मैदान में दोस्तों के बीच ख़ास घटना घटती ही है। अब करीब 12 साल से क्रिकेट नहीं खेला.. सब दूर हो गए, जॉब में लग गए.. कुछ के शरीर इतने lazy हो गए कि अब वो लोग खेल भी नहीं सकते।

इस बार जब घर लौटा था एक दिन फील्ड में गया.. देखा सभी नए बच्चे थे.. एक समय था जब मेरे फील्ड में घुसते ही सभी लोग पहचान लेते थे पर अब नए बच्चे थे कोई मुझे नहीं जानता था.. उस समय के सारे लोग replace हो चुके थे।
काश फिर से वो समय आ जाता जब सुबह सुबह दोस्त मुझे खिड़की से आवाज देते थे.." भैया.. जल्दी चलिए.. सब इंतज़ार कर रहे हैं फील्ड में"
::यादें::

महाराज युद्धिष्ठिर से लेकर मुहम्मद गौरी तक के राजाओं के नाम

महाभारत युद्ध के पश्चात् राजा युधिष्ठिर की ३० पीढ़ियों ने १७७० वर्ष ११ माह १० दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा हैः 
  1. युधिष्ठिर : ३६ वर्ष
  2. परीक्षित: ६० वर्ष
  3. जनमेजय: ८४ वर्ष
  4. अश्वमेध: ८२ वर्ष
  5. द्वैतीयरम: ८८ वर्ष 
  6. क्षत्रमाल: ८१ वर्ष 
  7. चित्ररथ: ७५ वर्ष 
  8. दुष्टशैल्य: ७५ वर्ष 
  9. उग्रसेन: ७८ वर्ष
  10. शूरसेन: ७८ वर्ष 
  11. भुवनपति: ६९ वर्ष 
  12. रणजीत: ६५ वर्ष 
  13. श्रक्षक: ६४ वर्ष 
  14. सुखदेव: ६२ वर्ष 
  15. नरहरिदेव: ५१ वर्ष 
  16. शुचिरथ: ४२ वर्ष 
  17. शूरसेन द्वितीय: ५८ वर्ष 
  18. पर्वतसेन: ५५ वर्ष 
  19. मेधावी: ५२ वर्ष 
  20. सोनचीर: ५० वर्ष 
  21. भीमदेव: ४७ वर्ष
  22. नरहिरदेव द्वितीय: ४७ वर्ष 
  23. पूरनमाल: ४४ वर्ष 
  24. कर्दवी: ४४ वर्ष 
  25. अलामामिक: ५० वर्ष 
  26. उदयपाल: ३८ वर्ष 
  27. दुवानमल: ४० वर्ष 
  28. दामात: ३२ वर्ष 
  29. भीमपाल: ५८ वर्ष 
  30. क्षेमक: ४८ वर्ष 
क्षेमक के प्रधानमन्त्री विश्व ने क्षेमक का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी १४ पीढ़ियों ने ५०० वर्ष ३ माह १७ दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. विश्व: १७ वर्ष 
  2. पुरसेनी: ४२ वर्ष 
  3. वीरसेनी: ५२ वर्ष 
  4. अंगशायी: ४७ वर्ष 
  5. हरिजित: ३५ वर्ष 
  6. परमसेनी: ४४ वर्ष 
  7. सुखपाताल: ३० वर्ष 
  8. काद्रुत: ४२ वर्ष 
  9. सज्ज: ३२ वर्ष  
  10. आम्रचूड़: २७ वर्ष 
  11. अमिपाल: २२ वर्ष 
  12. दशरथ: २५ वर्ष 
  13. वीरसाल: ३१ वर्ष 
  14. वीरसालसेन: ४७ वर्ष 
वीरसालसेन के प्रधानमन्त्री वीरमाह ने वीरसालसेन का वध करके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी १६ पीढ़ियों ने ४४५ वर्ष ५ माह ३ दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. वीरमाह: ३५ वर्ष 
  2. अजितसिंह: २७ वर्ष 
  3. सर्वदत्त: २८ वर्ष 
  4. भुवनपति: १५ वर्ष 
  5. वीरसेन: २१ वर्ष 
  6. महिपाल: ४० वर्ष 
  7. शत्रुशाल: २६ वर्ष 
  8. संघराज: १७ वर्ष 
  9. तेजपाल: २८ वर्ष 
  10. मानिकचंद: ३७ वर्ष 
  11. कामसेनी: ४२ वर्ष 
  12. शत्रुमर्दन: ८ वर्ष 
  13. जीवनलोक: २८ वर्ष 
  14. हरिराव: २६ वर्ष 
  15. वीरसेन द्वितीय: ३५ वर्ष 
  16. आदित्यकेतु: २३ वर्ष 
प्रयाग के राजा धनधर ने आदित्यकेतु का वध करके उसके राज्य को अपने अधिकार में कर लिया और उसकी ९ पीढ़ी ने ३७४ वर्ष ११ माह २६ दिन तक राज्य किया जिसका विरवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. धनधर: २३ वर्ष 
  2. महर्षि: ४१ वर्ष 
  3. संरछि: ५० वर्ष 
  4. महायुध: ३० वर्ष 
  5. दुर्नाथ: २८ वर्ष 
  6. जीवनराज: ४५
  7. रुद्रसेन: ४७ वर्ष 
  8. आरिलक: ५२ वर्ष 
  9. राजपाल: ३६ वर्ष 
सामन्त महानपाल ने राजपाल का वध करके १४ वर्ष तक राज्य किया। 
अवन्तिका (वर्तमान उज्जैन) के विक्रमादित्य ने महानपाल का वध करके ९३ वर्ष तक राज्य किया। 
विक्रमादित्य का वध समुद्रपाल ने किया और उसकी १६ पीढ़ियों ने ३७२ वर्ष ४ माह २७ दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. समुद्रपाल: ५४ वर्ष 
  2. चन्द्रपाल: ३६ वर्ष 
  3. सहपाल: ११ वर्ष 
  4. देवपाल: २७ वर्ष 
  5. नरसिंहपाल: १८ वर्ष 
  6. सामपाल: २७ वर्ष 
  7. रघुपाल: २२ वर्ष 
  8. गोविन्दपाल: २७ वर्ष 
  9. अमृतपाल: ३६ वर्ष 
  10. बालिपाल: १२ वर्ष 
  11. महिपाल: १३ वर्ष 
  12. हरिपाल: १४ वर्ष 
  13. सीसपाल: ११ वर्ष (कुछ ग्रंथों में सीसपाल के स्थान पर भीमपाल का उल्लेख मिलता है, सम्भव है कि उसके दो नाम रहे हों।).
  14. मदनपाल: १७ वर्ष 
  15. कर्मपाल: १६ वर्ष 
  16. विक्रमपाल: २४ वर्ष 
विक्रमपाल ने पश्चिम में स्थित राजा मालकचन्द बोहरा के राज्य पर आक्रमण कर दिया जिसमे मालकचन्द बोहरा की विजय हुई और विक्रमपाल मारा गया। मालकचन्द बोहरा की १० पीढ़ियों ने १९१ वर्ष १ माह १६ दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. मालकचन्द: ५४ वर्ष 
  2. विक्रमचन्द: १२ वर्ष 
  3. मानकचन्द: १० वर्ष 
  4. रामचन्द: १३ वर्ष 
  5. हरिचंद: १४ वर्ष 
  6. कल्याणचन्द: १० वर्ष 
  7. भीमचन्द: १६ वर्ष 
  8. लोवचन्द: २६ वर्ष 
  9. गोविन्दचन्द: ३१ वर्ष 
  10. रानी पद्मावती: १ वर्ष 
रानी पद्मावती गोविन्दचन्द की पत्नी थीं। कोई सन्तान न होने के कारण पद्मावती ने हरिप्रेम वैरागी को सिंहासनारूढ़ किया जिसकी ४ पीढ़ियों ने 50 वर्ष 0 माह 12 दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. हरिप्रेम: ७ वर्ष 
  2. गोविन्दप्रेम: २० वर्ष 
  3. गोपालप्रेम: १५ वर्ष 
  4. महाबाहु: ६ वर्ष 
महाबाहु ने सन्यास ले लिया। इस पर बंगाल के अधिसेन ने उसके राज्य पर आक्रमण कर अधिकार जमा लिया। अधिसेन की १२ पीढ़ियों ने १५२ वर्ष ११ माह २ दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. अधिसेन: १८ वर्ष 
  2. विल्वसेन: १२ वर्ष 
  3. केशवसेन: १५ वर्ष 
  4. माधवसेन: १२ वर्ष 
  5. मयूरसेन: २० वर्ष 
  6. भीमसेन: ५ वर्ष 
  7. कल्याणसेन: ४ वर्ष 
  8. हरिसेन: १२ वर्ष 
  9. क्षेमसेन: ८ वर्ष 
  10. नारायणसेन: २ वर्ष 
  11. लक्ष्मीसेन: २६ वर्ष 
  12. दामोदरसेन: ११ वर्ष 
दामोदरसेन ने उमराव दीपसिंह को प्रताड़ित किया तो दीपसिंह ने सेना की सहायता से दामोदरसेन का वध करके राज्य पर अधिकार कर लिया तथा उसकी ६ पीढ़ियों ने १०७ वर्ष ६ माह २२ दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है।
  1. दीपसिंह: १७ वर्ष 
  2. राजसिंह: १४ वर्ष 
  3. रणसिंह: ९ वर्ष 
  4. नरसिंह: ४५ वर्ष 
  5. हरिसिंह: १३ वर्ष 
  6. जीवनसिंह: ८ वर्ष
पृथ्वीराज चौहान ने जीवनसिंह पर आक्रमण करके तथा उसका वध करके राज्य पर अधिकार प्राप्त कर लिया। पृथ्वीराज चौहान की ५ पीढ़ियों ने ८६ वर्ष २० दिन तक राज्य किया जिसका विवरण नीचे दिया जा रहा है। 
  1. पृथ्वीराज: १२ वर्ष 
  2. अभयपाल: १४ वर्ष 
  3. दुर्जनपाल: ११ वर्ष 
  4. उदयपाल: ११ वर्ष 
  5. यशपाल: ३६ वर्ष 
विक्रम संवत १२४९ (1193 AD) में मोहम्मद गोरी ने यशपाल पर आक्रमण कर उसे प्रयाग के कारागार में डाल दिया और उसके राज्य को अधिकार में ले लिया।

हिन्दू धर्म का ज्ञान

कम से कम ज्ञात रूप से 90,000 वर्षों से हिन्दू सनातन धर्म का अस्तित्व है। 35,000 वर्ष पहले तक की सभ्यता के पूख्‍ता सबूत पाए गए हैं। 14,000 वर्ष पहले हिन्दू युग की शुरुआत हुई थी। अब तक वराह कल्प के स्वायम्भुव मनु, स्वरोचिष मनु, उत्तम मनु, तामस मनु, रैवत मनु, चाक्षुष मनु तथा वैवस्वत मनु के मन्वंतर बीत चुके हैं और अब वैवस्वत तथा सावर्णि मनु की अंतरदशा चल रही है। मथुरा के विद्वान ऐसा अनुमान लगाते हैं कि सावर्णि मनु का आविर्भाव विक्रमी संवत् प्रारंभ होने से 5630 वर्ष पूर्व हुआ था। माना जाता है कि वैवस्वत मनु का आविर्भाव 6673 ईसा पूर्व अर्थात 8689 वर्ष पहले हुआ था।
6,000 ईसा पूर्व में भारत में बहुत ही विद्वान खगोलशास्त्री विद्यमान थे जिन्होंने वेदों के ज्ञान पर आधारित खगोल विज्ञान का विकास किया और बताया कि धरती सूर्य का चक्कर लगाती और चन्द्रमा धरती का चक्कर लगाता है और धरती में गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है। आज इस बात को विज्ञान भी मानता है, गैलीलियो या न्यूटन ने कोई नई बात नहीं बताई थी।

रक्तचाप की खोज, प्लास्टिक सर्जरी, विमान का आविष्कार, बिजली का आविष्कार, गणितीय विद्या, शून्य का आविष्कार, भाषा और व्याकरण का आविष्कार आदि अनेक ऐसे आविष्कार हैं जिनके बारे में तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला के विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता था।

लोग अल्बर्ट आइंस्टीन के उस वाक्य को भूल जाते हैं जिसमें उन्होंने कहा था- 'हम भारतीयों के बेहद आभारी हैं जिन्होंने हमें गिनना सिखाया जिसके बिना कोई भी वैज्ञानिक खोज करना मुमकिन नहीं था।'

यदि हम शरीर के तंत्रिका तंत्र की बात करें तो इसका उल्लेख पहले से ही वेद, आयुर्वेद और योग की किताबों में मौजूद है। यह जानकारी उसी रूप में मौजूद है जिस रूप में विज्ञान आज इसे प्रकट करता है। विज्ञान की यह जानकारी वेदों में दी गई शरीर के रचना-तंत्र की जानकारी से इतनी मिलती-जुलती है कि इससे सभी हैरान हैं कि 6,000 वर्ष पूर्व यह कैसे पता चला?

परा और अपरा विद्या :
हिन्दू धर्म में ज्ञान को 2 श्रेणियों में रखा गया है। पहला परा विद्या और दूसरा अपरा विद्या। सभी तरह का वैज्ञानिक ज्ञान परा विद्या के अधीन है और वहीं आध्यात्मिक ज्ञान अर्थात परमात्मा और आत्मा का ज्ञान अपरा विद्या के अंतर्गत आता है। वैज्ञानिक ज्ञान ही आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ले जाता है।

हिंदू दर्शन के मुताबिक ब्रह्मांड की रचना करने वाला कोई व्यक्ति या एक कहानी नहीं है। इसके अनुसार जन्म और मृत्यु के चक्र में सभी गुंथे हुए हैं। चाहे आत्मा हो, शरीर, दृश्य या अदृश्य सबका इस चक्र में महत्व है।

हिन्दू धर्म के 5 मुख्य आधार हैं- ईश्वर, जीव, काल, प्रकृति और कर्म। इनमें पहले 5 अनंत हैं जबकि कर्म अस्थायी। काल का अर्थ समय। समय ईश्वर का अव्यक्तिगत और अनंत पक्ष है। इसका न आदि है और न अंत। हिन्दू धर्म के ब्रह्मांड की थ्‍योरी बिग बैंग द्वारा दी गई थ्योरी से 104 गुना ज्यादा है। वर्तमान सृष्टि अनगिनत सृष्टियों में से एक है। इसमें धरती पर 84 लाख प्रकार के करोड़ों जीव मौजूद हैं। ईश्‍वर और जीव में यह अंतर है कि ईश्‍वर अजन्मा और अनंत है जबकि जीव उसका सूक्ष्मतम रूप है। जीव शरीर धारण करता रहता है, लेकिन ईश्‍वर अजन्मा और अप्रकट है। ईश्‍वर को परमात्मा एवं जीव को एक आत्मा कहा जाता है। ईश्वर ने कभी न तो मनुष्य रूप में जन्म लिया और न ही किसी के शरीर पर अवतरित होकर कोई संदेश दिया। ऋषियों को जो ज्ञान मिला वह गहन ध्यान के क्षणों में मिला और उन्होंने जब उसे लोगों को सुनाया तो उसे श्रुति कहा गया। यह ज्ञान स्वयं ईश्वर ने दिया था। श्रुति के ज्ञान को जब लोगों ने सुनकर अपनी पीढ़ियों को विस्तृत रूप में अपने अपने तरीके से बताया तो उसे स्मृति ज्ञान कहा गया। इस तरह दो ग्रंथ बने श्रुति और स्मृति। श्रुति ही धर्मग्रंथ है।

प्रकृति में पदार्थ से अलग आत्मा एक सर्वोत्तम कण या परम अणु है जिसमें चेतना और स्वेच्छा है, जो पदार्थ से पूर्णत: विपरीत है लेकिन जो पदार्थ को संचालित करती रहती है। यही चेतना ब्रह्मांड की प्रेरक है और हर जीवित वस्तु में आत्मा रूप में विद्यमान है। हिन्दू धर्म के अनुसार पेड़-पौधों, कीट-पतंगों, गतिशील तत्वों में आत्मा अर्थात चेतना विद्यमान है। इस आत्मा का मूल स्वरूप परमात्मा के समान ही है, जैसे सत, चित्त और आनंद।

सर्वेश्वरवाद या अवतारवाद वेद नहीं पुराणों के अंग है। यह मूल सनातन धर्म की विचारधारा से अलग माने जाते हैं। दरअसल, ये सभी पहलू ईश्वर या परम तत्व के मूलभूत अंग माने जा सकते हैं। वेदों के अनुसार तो ईश्वर एक ही है।

परमात्मा या ईश्‍वर के मुख्‍यत: 3 पहलू हैं। पहला अव्यक्तिगत अर्थात ब्रह्म ज्योति। यह कारण और प्रभाव से ऊपर है। दूसरा पक्ष है परमात्मा, जो सभी जीवों की प्रेरणा है। परमात्मा या परमेश्