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Monday, 26 March 2018

श्री हनुमान जी के समाज के बारे में..

वानर का शाब्दिक अर्थ होता है 'वन में रहने वाला नर।' वन में ऐसे भी नर रहते थे जिनको पूछ निकली हुई थी। नए शोधानुसार प्रभु श्रीराम का जन्म 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था अर्थात आज (फरवरी 2015) से लगभग 7129 वर्ष पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से 12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का नाम कपि था। हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था।

दरअसल, आज से 9 लाख वर्ष पूर्व मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है। ये सभी पुरातत्ववेत्ता अनुसंधायक एकमत से स्वीकार करते हैं कि पुराकालीन बहुत से प्राणियों की नस्ल अब सर्वथा समाप्त हो चुकी है।

वानरों के साम्राज्य की राजधानी किष्किंधा थी। सुग्रीव और बालि इस सम्राज्य के राजा थे। यहां पंपासरोवर नामक एक स्थान है जिसका रामायण में जिक्र मिलता है। 'पंपासरोवर' अथवा 'पंपासर' होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम दिशा में, पंपासरोवर स्थित है।

सेंट्रल अमेरिका के मोस्कुइटीए (Mosquitia) में शोधकर्ता चार्ल्स लिन्द्बेर्ग ने एक ऐसी जगह की खोज की है जिसका नाम उन्होंने ला स्यूदाद ब्लैंका (La Ciudad Blanca) दिया है जिसका स्पेनिश में मतलब व्हाइट सिटी (The White City) होता है, जहां के स्थानीय लोग बंदरों की मूर्तियों की पूजा करते हैं। चार्ल्स का मानना है कि यह वही खो चुकी जगह है जहां कभी हनुमान का साम्राज्य हुआ करता था।

एक अमेरिकन एडवेंचरर ने लिम्बर्ग की खोज के आधार पर गुम हो चुके ‘Lost City Of Monkey God’ की तलाश में निकले। 1940 में उन्हें इसमें सफलता भी मिली पर उसके बारे में मीडिया को बताने से एक दिन पहले ही एक कार दुर्घटना में उनकी मौत हो गई और यह राज एक राज ही बनकर रह गया।

अमेरिकन इतिहासकार मानते हैं‍ कि भारतीय आर्यों ने ही अमेरिका महाद्वीप पर सबसे पहले बस्तियां बनाई थीं। अमेरिका के रेड इंडियन वहां के आदि निवासी माने जाते हैं और हिन्दू संस्कृति वहां पर आज से हजारों साल पहले पहुंच गई थी। माना जाता है कि यह बसाहट महाभारतकाल में हुई थी।  वैसे तो पूरी दुनिया के सबसे प्राचीन लोग जब हिन्दू ही थे तो जाहिर है हरेक सभ्यता उनके ही द्वारा शुरू हुयी होगी।।
(26 मार्च 2016 की पोस्ट)

Sunday, 2 July 2017

पीएम चाहे तो देश से इस्लाम खत्म हो सकता है

अगर पीएम चाह ले तो बहुत कुछ हो सकता है.. ऐसा कायापलट हो सकता है जो सिर्फ आप सपनों में सोच सकते हो.. अगर पीएम चाह लेंगे कि भारत से मुसलमानों को मिटाना है तो मिटा सकते हैं..

क्या जिन्नाह ने पाकिस्तान से हिंदुओं को नहीं मिटा दिया ? हुआ या नहीं ? ये 100 % संभव है। इससे बड़ा मौका क्या हो सकता था कि दुनिया के सबसे ताकतवर और चालाक देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुस्लिम- विरोधी हैं.. आप चाहते तो उनके साथ मिलकर गुप्त एजेंडे तय कर सकते थे.. इस्राएल और अमेरिका खुद भी यही चाहते हैं... बल्कि आज के समय मे इस मामले में जहां मोदीजी निष्क्रिय पड़ गए हैं वही इजराइल और अमेरिका अपने मकसद में लगे हुए हैं.. आखिरकार ट्रम्प ने मुस्लिम- बैन का वीसा पास करवा ही लिया है..

अपने देश से मुसलमानों का सफाया करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा.. हिन्दू संगठनों को मजबूत करना, मदरसों- मस्जिदों को अवैध जमीन पर बना बताकर धीरे धीरे करके तोड़ना, मदरसों पर इतनी ज्यादा कार्रवाई करना कि लोग बच्चों को मदरसे भेजने से घबराने लगें, इनकी उस अरबी मुग़लिया सोच को विकलांग बनाना... इनकी आबादी को रोक देना... मुस्लिम मोहल्लों को खत्म करने की पहल करना... जहां से हिन्दू पलायन किये है वहां के मुस्लिम समाज को पलायन करवा के असल हिन्दू मालिकों को व्यवस्थित करना... किताबों में मुग़लों का असली चित्रण करके मुल्लों को शर्मसार कराना, इतनी शर्मिंदगी का माहौल तैयार करना कि इज्जत पाने के लिए इस्लाम को छोड़ने जैसी सोच पनपने लगे.. . अदालत में मुल्ले मौलवियों और इमामों को घसीटना, कोर्ट के चक्कर लगवाना.. ताकि इस काम से ये लोग भाग खड़े हों।।

सरकारी तरीके से और थोड़े बहुत चालाकी और खून खराबे से ये सम्भव हो जाएगा,  लेकिन दूसरे हिंदूवादी लोग अगर ये करना चाहेंगे तो समस्या अपरंपार है लेकिन अगर पीएम जैसे पोस्ट से ये ना हो रहा हो तो हिंदूवादियों ने जो भी रास्ता अपनाया है, उसी भरोसे रहना होगा।

Monday, 29 August 2016

सैकड़ों साल जीने वाले हालिया संत देवराहा बाबा

जब हम योगी सन्यासियों के चमत्कारों की बातें करते हैं तो सब बहुत पुरानी बातें होती है, और जैसे बात इतिहास की आती है तो मुल्ले या सेक्युलर तुरंत कह देते हैं कि इसका सबूत क्या है , लेकिन मैं ऐसे लोगों सहित उनलोगों को भी चैलेंज करता हूँ जो सिर्फ आज के विज्ञान को अपना सबकुछ मानते हैं। वो ही बताएं कि देवराहा बाबा की उम्र क्या थी ? बात इतिहास की भी नहीं है, इनके तो वीडियो तक उपलब्ध है, यूट्यूब पर। हाल की बात है। अगर उम्र 250 साल थी या 500 साल या 900 साल तो फिर कैसे ? डॉक्टर का साइंस क्या कहता है ? क्या इंसान इतने जिन्दा रह सकता है ? कोई एलोपैथिक दवाई खाकर ? या मशीन में रख कर ? फिर ये कैसे हुआ ? वो भी लगभग भूखे रह कर ?? आज के नास्तिक विज्ञानवादियों को जवाब देना चाहिए .... खाली कोरी गप्प नहीं मारनी चाहिए कि आज का विज्ञानये है वो है और पहले तो कुछ नहीं था.... अगर नहीं था वो भी इंसान को इतने साल तक जीवित रखकर दिखाएं।।

मंगलवार, 19 जून सन् 1990 को योगिनी एकादशी के दिन अपना प्राण त्यागने वाले इस बाबा के जन्म के बारे में संशय है. कहा जाता है कि वह करीब 900 साल तक जिन्दा थे. (बाबा के संपूर्ण जीवन के बारे में अलग-अलग मत है, कुछ लोग उनका जीवन 250 साल तो कुछ लोग 500 साल मानते हैं.)

श्रद्धालुओं के कथनानुसार बाबा अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से बड़े प्रेम से मिलते थे और सबको कुछ न कुछ प्रसाद अवश्य देते थे. प्रसाद देने के लिए बाबा अपना हाथ ऐसे ही मचान के खाली भाग में रखते थे और उनके हाथ में फल, मेवे या कुछ अन्य खाद्य पदार्थ आ जाते थे जबकि मचान पर ऐसी कोई भी वस्तु नहीं रहती थी. श्रद्धालुओं को कौतुहल होता था कि आखिर यह प्रसाद बाबा के हाथ में कहाँ से और कैसे आता है. जनश्रूति के मुताबिक, वह खेचरी मुद्रा की वजह से आवागमन से कहीं भी कभी भी चले जाते थे. उनके आस-पास उगने वाले बबूल के पेड़ों में कांटे नहीं होते थे. चारों तरफ सुंगध ही सुंगध होता था.

यमुना के किनारे वृन्दावन में वह 30 मिनट तक पानी में बिना सांस लिए रह सकते थे. उनको जानवरों की भाषा समझ में आती थी. खतरनाक जंगली जानवारों को वह पल भर में काबू कर लेते थे. योग विद्या पर उनका गहन ज्ञान था. ध्यान, योग, प्राणायाम, त्राटक समाधि आदि पर वह गूढ़ विवेचन करते थे. कई बड़े सिद्ध सम्मेलनों में उन्हें बुलाया जाता, तो वह संबंधित विषयों पर अपनी प्रतिभा से सबको चकित कर देते. लोग यही सोचते कि इस बाबा ने इतना सब कब और कैसे जान लिया. ध्यान, प्रणायाम, समाधि की पद्धतियों के वह सिद्ध थे ही. धर्माचार्य, पंडित, तत्वज्ञानी, वेदांती उनसे कई तरह के संवाद करते थे. उन्होंने जीवन में लंबी लंबी साधनाएं कीं. जन कल्याण के लिए वृक्षों-वनस्पतियों के संरक्षण, पर्यावरण एवं वन्य जीवन के प्रति उनका अनुराग जग जाहिर था.

Sunday, 14 August 2016

क्या आप हिंदुत्व की रक्षा के लिए 50 रुपये भी दान करेंगे

सभी कहते हैं धरातल पर कब हिंदुत्व के लिए कुछ करोगे ? सिर्फ फेसबुक पर लिखने से क्या होगा ? गौसेवा  में अगर किसी जगह आदमी की जरुरत है पैसे की जरुरत है तो कौन करेगा ? किसी जगह कोई हिन्दू भाई मुसीबत में फंसा है तो मदद कौन करेगा ? किसी को मुसलमानो ने या सेक्युलर सरकार ने गलत आरोप लगाकर फंसा दिया तो जमानत कौन लेगा ? ? ऐसी कई समस्याएं हैं जो सिर्फ फेसबुक से तो हल नहीं होती ...
लेकिन अब इसका जो सबसे बड़ा पक्ष है वो है पैसा... ।।



मुस्लिम समाज में ऐसे ही काम के लिए अफरात पैसे आते हैं, जिसे जकात कहते हैं, सऊदी से, पाकिस्तान से, ईराक से, और खुद भारत का हर मुसलमान का नियम बंधा है वो कुछ भी रकम देगा चाहे 50 रूपया हो या 20 रूपया। फिर उसी से वो अपने भाइयों को थाने से, अदालत से निकालते है, हथियार खरीदते हैं, मस्जिद बनाते हैं, मोहल्ले को सुरक्षित करते हैं, धर्मप्रचार करते हैं, धर्मप्रचार करने वाले मौलाना मौलवी को लिखने के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट देते हैं तो पढ़ने के लिए किताबें देते है और उनकी यात्रा का खर्च उठाते हैं, सबकुछ करते हैं, कुछ तो जो अमीर मुस्लिम होते है वो दिल खोल कर पैसे देते हैं।

अब मेरे भाइयों आपलोग सोचना कि जब वो लोग इस तरह से धरातल पर कब्ज़े के लिए इतना करते है तो हमलोग उनके सामने कुछ भी नहीं हैं, हमलोग इसी वजह से पिछड़ जाते हैं, आज अगर मैं कहूँ कि एक अकाउंट में सिर्फ 20 रुपये दो तो आपलोग आधे तो अनफ्रेंड हो जाओगे, आधे जवाब नहीं देकर मरणासन्न हालात में कोपभवन में चले जाओगे, ज्यादातर तो पढ़ेंगे पर डर से like नहीं करेंगे। (ये मेरे फेसबुक पेज की पोस्ट है इसलिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल है)

क्योंकि हम हिन्दू जलनशील स्वाभाव के हैं, सभी सोचेंगे कि
1. लो शुरू कर दिया पैसा कमाने का धंधा..
2. मैं क्यों दूंगा पैसा, पता नहीं पैसा कहां जाएगा
3. पैसे से खुद  मौज उड़ाएगा, 
4. आईडिया अच्छा है, क्यों ना पैसे कमाने के लिए मैं भी ऐसा ही करूँ
5. हे भगवान्, ऐसे तो ये बहुत पैसा कमा लेगा यार.. इसको आगे नहीं निकलने देना चाहिए। 
6. ये सब बकवास है, सबकुछ सोशल मीडिया से ही हो जायेगा, इतने धनवान मंदिर है, कहाँ कुछ होता है ? इत्यादि।

ये आपकी सोच है और इसका मुझे पूरा पता है, आपका एक एक पैसा कैराना और कांधला में छूट जायेगा दूकान जमीन सहित, लेकिन आप 20 रूपये दोगे नहीं। आप 500 रुपये के बड़े बड़े भगवान के फोटो फ्रेम करके लगा लोगे लेकिन 50 रुपये कोई मांगे तो तुरंत उसी पल से आप उसे हिन्दुवादी से भिखारी की श्रेणी में रख के व्यवहार करोगे।

आज जो आपलोग इस्लाम के बारे में इतना डट के बोलते हो और कुरआन, हदीश की बातें जानने लगे हो वो आपकी मेहनत से नहीं है, आप तो कुरआन पढ़ ही नहीं सकते, मैं जानता हूँ इसका जनक कौन है, और ये भी जानता हूँ कि उर्दू अरबी फ़ारसी सहित कई भाषाओं के जानकार उस बुजुर्ग विद्वान का कंप्यूटर दो साल से खराब है। उसने तो बड़े बड़े हिन्दुवादियों से मदद मांगी पर एक रूपया नहीं मिला। हमारे कई हिन्दू भाइयो को अखिलेश और नितीश ममता के राज में यूँही पकड़ लेते हैं, उनको कौन छुड़ाएगा ? ? परिवार तो इसके दौड़ेंगे मगर आप और हम उसकी मदद नहीं कर सकते ? अगर सबने 50 - 50 रुपये भी महीने के दिए हैं तो हम उसे 2000 या 5000 रुपये भेज सकते हैं। कुछ भी मदद कीजिये। ऐसे बैठे बैठे सबकुछ हाथों से निकल जायेगा। साध्वी प्रज्ञा जी के लिए हमारे एक भाई दौड़ते हैं, कोर्ट में हम उनको हरेक अदालती तारीख पर 1 हज़ार तो दे सकते हैं ?

पूर्वाजो का धर्म था भिक्षा देना

भाइयों ये समय है जब कुछ करना होगा जिसके असर नजर आये। मोदीजी प्रधानमंत्री है, वो आपके धर्मरक्षा के साथ उसके धर्मरक्षा से भी बंधे हुए हैं, मज़बूरी है, आप आगे आओ, और महीने के 50 रुपये कम से कम दो। इसका सारा हिसाब किसने कितना दिया और कहाँ खर्च हुआ वो खुलेतौर पर मेरे ब्लॉग्स पर दर्ज रहेगा।
आजकल ऑनलाइन पैसे भी आराम से मोबाइल से ही ट्रांसफर होते हैं। या जैसे भी करो। फिलहाल मैं उस बुजुर्ग के लिए कम्यूटर लेना चाहता हूँ जिसने पूरी दुनिया में इस्लाम की सच्चाई पहली बार खोली। अकाउंट नंबर दे रहा हूँ।
samir kumar, SBI, ac no. 30029424684,
IFSC CODE- IFSC= SBIN0009007,
Branch- Purani Godown, Gaya (bihar)
Email- samirarty2k@gmail.com

(चूँकि कोई भी अकाउंट पुरे देश के ब्रांच में किसी भी कार्य के लिए समस्या नहीं देती तो मुम्बई में रहकर मैं इसी अकाउंट का प्रयोग करता हूँ।)

और हाँ ये मदद सिर्फ मेरे जानकारी पर नहीं होगी, आपके आसपास भी जरुरत होगी तो पैसे भेजे जाएंगे। खुद कभी आपको जरुरत लगी तो वहाँ भी पैसे जाएंगे। कोशिश करने में क्या हर्ज है। 50 ना सही 20 ही रुपये सही, अब आपके मन में वही सब आ रहा होगा जो ऊपर छह पॉइंट मैंने लिखे ?

आपकी बात जानता हूँ आप सब मदद करना चाहते हो पर सड़क पर जाकर लाठियां नहीं खाना चाहते, नौकरी छोड़ कर जाना नहीं चाहते और इसलिए मैं ये विकल्प दे रहा हूँ कि घर बैठे जो कर सकते हैं वो करते हैं, वो भी बिना खतरा उठाये।