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Monday, 29 August 2016

एक ऐसी चीज़ जो मिटा देती है हर रोग

एक ऐसी भी चीज है जिसकी आयुर्वेद के दुर्लभ ग्रथों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की है और इतना ही नहीं जीवों द्वारा प्राप्त होने वाली दवाओं की श्रेणी में इसे सर्वोच्च स्थान अर्थात प्रथम स्थान दिया गया है ! इस दवा का नाम तो बहुत लोगों ने सुना होगा पर इसके प्रचंड प्रताप की सम्पूर्ण जानकारी बहुत कम मनीषियों को ही है !

अगर हम बहुत प्राचीन रहस्मय हिन्दू धर्म के ग्रंथों का अध्ययन करे तो पाते हैं की कई जगह गाय माता को साक्षात भगवान श्री कृष्ण का ममत्व रुपी प्रत्यक्ष अवतार कहा गया है !


गोमूत्र में स्वर्ण धातु की उपस्थिति की वजह से ये पीलापन लिए हुए दिखती है ! स्वयं श्री बालकृष्ण जी ने गोमूत्र से सोने का टुकड़ा पैदा किया है, जिसे कोई भी आदमी जा कर उनके आश्रम में देख सकता है ! आयुर्वेद में सोने को चिर यौवन – हमेशा जवानी प्रदाता बोला गया है इसलिए कई औषधियों में स्वर्ण भस्म मिलायी जाती है जबकि गोमूत्र में तो सबसे बेहतरीन क्वालिटी का स्वर्ण अच्छे खासे मात्रा में मिला होता है ! हमेशा जवान रखने वाली यह सोना धातु सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के मूत्र में होता हैं ना कि जर्सी गाय, संकर गाय या भैंस के मूत्र में हैं ! इन्ही कई वजहों से कुछ वैद्याचार्य गाय माता की सबसे कीमती चीज दूध नहीं, बल्कि उनका मूत्र मानते हैं !


इसीलिए गाय माता का हर एक अंग, मानवों के लिए जबरदस्त वरदान है पर आज की डेट में समस्या यह है की 100 % शुद्ध देशी गाय माता भारत में बहुत कम जगह ही देखने को मिलती हैं, जबकि अधिकाँश जगह सिर्फ संकर गाय (जर्सी गाय व देशी बैल से पैदा गाय), जर्सी गाय या भैंस देखने को मिलती है !


अगर आपको कही से 100 % शुद्ध भारतीय देशी गाय माता मिल जाय तो समझ लीजिये की आपके हाथ वाकई में सेहत का खजाना लग गया है ! गाय माता अगर दूध दे रही है तो दूध अमृत और अगर दूध नहीं दे रही तो उनका मूत्र सुपर अमृत क्योंकि जब गाय माता दूध नहीं देती तो उनके मूत्र में औषधीय गुण कई गुना बढ़ जाते हैं ! इन्ही सब दुर्लभ खूबियों की वजह से आज ब्राजील जैसे देश में भारतीय देशी गाय माता 2 से 3 करोड़ रूपए में बिक रही हैं और एक हम लोग हैं कि उन्हें सड़कों के किनारे कूड़ा खाने पर मजबूर कर रहें हैं या ज्यादा से ज्यादा 1 – 2 रोटी खिलाकर ही अपने आप को धन्य मान ले रहें हैं !
देर आये दुरुस्त आये। पहले बाबा रामदेव ने गौमाता के महत्त्व को उस स्तर पर नहीं जाना था, लेकिन अबजब किसी माध्यम से उनको समझ में आया है तो उन्होंने करोड़ों रुपये लगा कर इसके लिए अभियान शुरू किया है, उनके आश्रम में असली देशी गायों का रक्षण और संवर्धन पर काम चल रहा है। कुछ समय बाद आप वहाँ से असली देशी गौमाता को ले कर भी जा सकेंगे। हाँ अगर अभी गौमूत्र सेवन करना चाहें तो पतंजलि का गई गौमूत्र खरीदें।

ऐसी कोई बीमारी नहीं जो इससे ठीक ना हो जाए। अगर कोई बीमारी नहीं हो तब तो और भी जरुरी है पीना क्योंकि फिर बीमारी होगी ही नहीं। इसकी शक्ति क्या है ये शायद आपको समझ ना आये, लेकिन जो समझ सकते हैं वो देर ना करें।





Wednesday, 10 August 2016

एक रात तो गुजारिये गौरक्षकों के साथ :)

आधी रात के बाद राजस्थान के एक सुनसान गांव के चौराहे पर अंधेरे में वो बाहर निकलता है.

सर्दियों की आहट लिए यह चांदनी के उजाले वाली एक रात है. पूरा इलाक़ा पहाड़ियों और पेड़ों की छाया में डूबा है.

तभी एक दर्जन से ज़्यादा आदमी भूतों की तरह अंधेरे से प्रकट होते हैं.
राजस्थान के इस इलाक़े में जांच पड़ताल करने वाले नवल किशोर शर्मा चिल्लाते हैं, ''आस पड़ोस में किसी गाड़ी की कोई सूचना?''
बाक़ी आदमी सिर हिला देते हैं और उनमें से एक कहता है, ''अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला, आज सब कुछ शांत लगता है.''

मोटरसाइकिल पर सवार शर्मा गठीले बदन के आदमी हैं. उनके बाल तेल से चमक रहे हैं और उनकी साफ़सुथरी दाढ़ी है. डेनिम की पैंट और हल्के पीले रंग की शर्ट के साथ ख़ाकी रंग का जूता पहन रखा है. रात होते ही सभी एक एक कर जमा हो जाते हैं, सबका एक मिशन है, गाय की रक्षा।

ये सभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाते हैं.
इनमें से कुछ तो 15 साल की उम्र तक के हैं. इनमें किसान, दुकानदार, अध्यापक, छात्र, डॉक्टर और बेरोज़गार सभी तरह के लोग शामिल हैं. अगुआई करने वाला शर्मा जी समेत अधिकांश का मानना था कि दादरी की घटना में जिस मुस्लिम आदमी को पीट-पीट कर मार डाला गया उसने वाक़ई में बीफ़ का सेवन किया था और ‘जब लड़ाई होती है तो लोग मरते हैं.’
इन सभी का भरोसा है कि 'गाय माता' ख़तरे में है.

इनमें से एक सूरज भान गुर्जर का कहना था, 'अगर हमने अभी नहीं रक्षा की तो गाय 20 सालों में ही ग़ायब हो जाएगी.'
इसी तरह के मिथकों और जोशो ख़रोश के साथ ये रात-रात भर गाय तस्करों को खोजते फिरते हैं. ये सभी लोग लाठी, डंडो, बेसबॉल बैट, हॉकी, पत्थरों, माचिस और डंडों पर हंसिया लगे हथियारों से लैस होते हैं.

ये लोग गाड़ियों को रोकने के लिए सड़क पर कीलें बिछा देते हैं और अपनी मोटरसाइकिल पर तस्करों का पीछा करते हैं.
गाय को बचाने की यह लड़ाई थोड़ी अव्यवस्थित सी दिखती है. तस्कर अंधेरे में इनकी ओर फ़ायर करते हैं और अक्सर ही उनकी तेज़ रफ़्तार गाड़ियों का पीछा किया जात है.

किसी ने कुछ दूरी पर जलती रोशनी देखी और ये लोग ज़मीन पर झुक गए. जब टिमटिमाती रोशनी बुझ गई तब पता चला कि यह किसी गाड़ी की नहीं थी.
एक और निगरानी ग्रुप ने एक ट्रक को रोका. लोगों में उत्तेजना बढ़ गई और सभी लोग उस ट्रक पर चढ़ गए लेकिन उन्हें हताशा हाथ लगी. इसमें दिल्ली के बाज़ार के लिए सूअर भर कर ले जाया जा रहा था.
ट्रक के ड्राइवर ज़ाकिर हुसैन से इन लोगों ने पूछा, ''तुम एक मुस्लिम हो और सूअर ले जा रहे हो?''
हुसैन ने कहा, ''मैं जीने के लिए हर चीज़ ढोता हूँ.''

इस समूह का दावा है कि उन्होंने अबतक 18 हज़ार गायों को बचाया है. इन गायों को 1992 में शुरू हुई एक गोशाला में रखा गया. इसमें अगर हम आक्रमक नहीं होंगे तो गौहत्यारे भी हत्यारों से लैस होते हैं वो हमें मारने में देर नहीं करते, कई बार गोलियां चलती हैं, हम सड़क पर लेट कर जान बचाते हैं पर छोड़ते नहीं है।

ध्रुव सिंह नाम के एक पुलिसकर्मी कहते हैं, ''गो तस्करी की शिकायतों को हम बहुत गंभीरता से लेते हैं और गाय सुरक्षा दल इसमें हमारी मदद करते हैं.''

दिन में सभी गौरक्षक आजीविका के लिए मेहनत करते है, जागते हैं , बावजूद इसके रात में सभी जान जोखिम में डालकर गौरक्षा का कार्य करते हैं। इसमें वो लोग सफल हुए हैं। किसी किसी दल का दावा है कि उन्होंने एल लाख से ऊपर गायों को बचाया है।

Sunday, 5 June 2016

गौमाता की आवाज सुनिए। दिल तड़प उठेगा।

मै कत्लखानों मै कसाइयों के सम्मुख ठेल दी जाती हूँ। चार दिनों तक मुझे भूखा  रखा जाता है ताकि मेरा हीमोग्लोबिन गलकर माँस से चिपक जाये। फिर मुझे घसीट कर लाया जाता है क्योंकी मै मूर्छित रहती हूँ। मुझ पर 200 डिग्री सेल्सियस वाष्प में उबलता हुआ पानी डाला जाता है। मै तडप उठती हूँ ।

हे मेरा दूध पीने वालों मै तुम्हे याद करती हूँ ।मुझे कठोरता से पीटा जाता है ताकि मेरा चमडा आसानी से उतर जाये। मेरी दौनो टाँगे बाँध कर मुझे उल्टा लटका दिया जाता है। फिर मेरे बदन से सारा चमडा निकाल लिया। जाता है। सुनों जीव धारियों अभी भी मैने प्राण नहीं त्यागे है। मै कातर निगाहों से देखती हूँ शायद इन कसाइयों के मन में मनुष्यता का जन्म हो। किन्तु इस समय मुझसे पोषित होने वाला कोई भी मानव मुझे बचाने नहीं आता। मेरे चमडे की चाहत रखने वाले दुष्ट कसाई मेरी जीवित अवस्था में ही मेरा चमडा उतार लेते है और तडप कर मै प्राण त्याग देती हूँ।

इस पावन और पवित्र भारत भूमी पर ऐसा कोई नहीं है क्या जो धर्म और कानून का पालन कर मेरे प्राण बचाये। ।
तुम्हारे द्वारा किये गये क्रूरतम हत्याचारों को सहकर भी मै तुम्हे श्राप नहीं दे सकती ना .................क्योंकि मै माँ हूँ ना।

Monday, 19 October 2015

वैज्ञानिक लैब में साबित गौमूत्र में पाये गए तत्व

* गौमूत्र में नाइट्रोजन, सल्फर, अमोनिया, कॉपर, लौह तत्व, यूरिक एसिड, यूरिया, फॉस्फेट, सोडियम, पोटैशियम, मैगनीज, कार्बोलिक एसिड, कैल्सियम, विटामिन ए, बी, डी, ई, एंजाइम, लैक्टोज, सल्फ्यूरिक अम्ल, हाइड्रॉक्साइड आदि मुख्य रूप से पाए जाते हैं। यूरिया मूत्रल, कीटाणुनाशक है। पोटैशियम क्षुधावर्धक, रक्तचाप नियामक है। सोडियम द्रव मात्रा एवं तंत्रिका शक्ति का नियमन करता है। मैग्नीशियम एवं कैल्सियम हृदयगति का नियमन करते हैं।

गाय का लिवर 4 भागों में बंटा होता है। इसके अंतिम हिस्से में एक प्रकार का एसिड होता है, जो कैंसर जैसे रोग को जड़ से मिटाने की क्षमता रखता है। गौमूत्र का ‍खाली पेट प्रतिदिन निश्‍चित मात्रा में सेवन करने से कैंसर जैसा रोग भी नष्ट हो जाता है।

* गाय के मूत्र में पोटैशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फॉस्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड होता है। दूध देते समय गाय के मूत्र में लैक्टोज की वृद्धि होती है, जो हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है।

* गौमूत्र में प्रति-ऑक्सीकरण की क्षमता के कारण डीएनए को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। गौमूत्र से बनी औषधियों से कैंसर, ब्लड प्रेशर, आर्थराइटिस, सवाईकल हड्डी संबंधित रोगों का उपचार भी संभव है।

गौ का वैज्ञानिक रूप से महत्त्व

हाल ही में कानपुर की एक गौशाला ने एक ऐसा सीएफएल बल्ब बनाया है, जो बैटरी से चलता है। इस बैटरी को चार्ज करने के लिए गौमूत्र की आवश्यकता पड़ती है। आधा लीटर गौमूत्र से 28 घंटे तक सीएफएल जलता रहेगा।

पेट्रोल, डीजल, कोयला व गैस तो सब प्राकृतिक स्रोत हैं, किंतु यह बायोगैस तो कभी न समाप्त होने वाला स्रोत है। जब तक गौवंश है, अब तक हमें यह ऊर्जा मिलती रहेगी।

सिर्फ एक प्लांट से करीब 7 करोड़ टन लकड़ी बचाई जा सकती है जिससे करीब साढ़े 3 करोड़ पेड़ों को जीवनदान दिया जा सकता है। साथ ही करीब 3 करोड़ टन उत्सर्जित कार्बन डाई ऑक्साइड को भी रोका जा सकता है।

केवल 40 करोड़ गौवंश के गोबर व मूत्र से भारत में 84 लाख एकड़ भूमि को उपजाऊ बनाया जा सकता है।

प्राचीनकाल में मकानों की दीवारों और भूमि को गाय के गोबर से लीपा-पोता जाता था। यह गोबर जहां दीवारों को मजबूत बनाता था वहीं यह घरों पर परजीवियों, मच्छर और कीटाणुओं के हमले भी रोकता था। आज भी गांवों में गाय के गोबर का प्रयोग चूल्हे बनाने, आंगन लीपने एवं मंगल कार्यों में लिया जाता है।