Showing posts with label नरेंद्र मोदी. Show all posts
Showing posts with label नरेंद्र मोदी. Show all posts

Thursday, 25 October 2018

हिंदुओं ने भाजपा को खून से सींचा .. मगर ..

जिस पार्टी को हिंदुओं ने अपने खून से सींच कर विशाल वटवृक्ष बनाया.. उसकी छांव में सिर्फ मुस्लिम बैठे हैं.... किसी को क्या पता था कि भाजपा इस तरह से हिंदुत्व की दुश्मन बन जाएगी..
किसे पता था कि जिस मोदी को हिंदुत्व की रक्षा के लिए सबसे उत्तम उत्तराधिकारी मान बैठे है वो जयचंद निकलेगा ?

आज जिस तरह से हरेक tv पर राम मंदिर का मुद्दा गरमाया हुआ है... वो भाजपा के चुनावी षड्यंत्र का अहम हिस्सा है... लेकिन इस बार मेरे जैसे करोड़ों हिन्दू हैं जिन्हें इस डिबेट और भाषणों से चिढ़ हो रही है... क्रोध आ रहा है...
ये वैसा ही है कि आपको पता है कि आपका कोई नजदीकी रिश्तेदार आपको बर्बाद करने पर तुला है लेकिन जब भी आपके सामने आता है तो मीठी मीठी बातें करता है और आप मन मसोस कर उल्टा चाय पानी पिलाते हैं....

इस बार भाजपा के लिए अगर कोई हिन्दू वोट देता है तो विकास के ही नाम पर देगा, राम मंदिर की सोचकर तो नहीं देगा...
और जो हिन्दू सिर्फ धर्म के नाम पर ही वोट करने वाले हैं , उनके सामने विकट समस्या रहेगी...
#भाजपा #राम_मन्दिर #श्रीराम #डिबेट #मोदी

Wednesday, 10 October 2018

मोदी की गंदी राजनीति का पहली बार पर्दाफाश

मोदी की कूटनीति की गंदगी क्या है ?

पहले चरण में इसके तहत हरेक गलत काम होने दिया जाता है..

दूसरे चरण में उस गलत काम को न्यूज़ में चलवाया जाता है.. और डिबेट में प्रवक्ता भाजपा की सार्थक छवि बनाने की कोशिश करते हैं..

तीसरे चरण में मामले को बद से बदतर होने तक का इन्तेजार किया जाता है...

चौथे चरण में ये कहा जाता है कि.. आज से पहले कौन जानता था कि... ऐसे लोग हमारे देश मे हैं... कौन जानता था कि ऐसा हमारे देश मे होता है... ये सब भाजपा के आने से ही उजागर हो रहा है...

पांचवे चरण में भाजपा सोचती है कि अब वो कार्रवाई करेंगे... लेकिन इस कूटनीति के तहत चार चरण को खेलने की वजह से दुश्मन को इतना मौका मिल चुका होता है कि वो अपनी सुरक्षा के इंतजाम कर लेते हैं.. और अंत मे पांचवां चरण भाजपा कभी पुरा नहीं कर पाती...
नतीजा... भाजपा की कूटनीति उसी के लिए जानलेवा बन जाती है। आइए अब दो उदाहरण देखते हैं...

जेएनयू प्रकरण में भाजपा ने सोचा अभी गिरफ्तार नहीं करेंगे... इनके सहारे अपनी देशभक्त की छवि को मजबूत करेंगे...

नतीजा भाजपा ने देर कर दी और दुश्मन ने मौके का फायदा उठा पूरे भारत मे भाजपा को रौंद दिया... हालात ये हुए कि भाजपा को अपना पांचवां चरण जैसे तैसे नेगेटिव छवि के साथ पूरा करना पड़ा.. और उनको कोर्ट से निकलना पड़ा।।।

ताजा उदाहरण देख लेते हैं.. गुजरात मे अप्रवासी हिंदीभाषी पर हमले शुरू हुए.. भाजपा ने पहले चरण के मुताबिक इसे होने दिया... याने इनको पिटने दो.. इससे हिंदीभाषियों की सहानुभूति भाजपा से जुड़नी तय थी...

दूसरे चरण मे प्रवक्ताओं को tv पर भेज गया ताकि वो पिट रहे लोगों के कंधे पर बंदूक रख कांग्रेस को टारगेट करें.. ध्यान दीजिए.. अबतक भाजपा ने कुछ नहीं किया था।। ये हिन्दू सिर्फ एक मोहरे की तरह पिटवाये जा रहे थे..

तीसरे चरण में मामले को बद से बदतर होने दिया गया ताकि माहौल को पूरा गर्मा कर तीन राज्यों के अपने वोटर को ये समझाया जा सके कि मैं ही हूँ तुम्हारा रखवाला और कोई नहीं..

चौथे चरण में हुआ कि कौन दोषी है, क्या चाहता है.. अंधभक्तों ने भी तबतक सोशल मीडिया चोंग्रेस के अल्पेश ठाकोर से रंग दिया... इस समय तक हिंदुओं को पिटने दिया गया.. ट्रेनों में भर भर कर जाने दिया गया.. क्योंकि इस तरह के कुछ दृश्यों की जरूरत थी..

पांचवें चरण में फिर बारी आई कार्रवाई करने की तो तबतक अल्पेश ठाकोर और चोंग्रेस आदि सबने अपनी सुरक्षा के इंतजाम कर लिए थे..उसने खुद ही दावा ठोंक दिया कि अगर ऐसा है तो सबूत लाओ... नतीजा कुछ सामान्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर भाजपा ने टाइमपास कर लिया.. और वैसे भी भाजपा का काम पूरा हो चुका था.. तीन राज्यों के वोटरों में  मेसेज भेज दिया कि मैं ही हूँ रखवाला..

सवाल ये है कि भाजपा शुरू में ही हिंदुओं को बचा क्यों नहीं लेती ? देश के दुश्मनों को तुरंत गिरफ्तार करके नेस्तनाबूत क्यों नहीं करती ? डिबेट, प्रचार सब बाद में भी तो हो सकता है ? अपने छवि को बनाने के लिए हिंदुओं को बलि का बकरा क्यों बनाती है ?

Saturday, 15 September 2018

मोदीजी आपने हमेशा शौचालय मुद्दे पर देश का अपमान किया

मैं आज भी कहता हूं, लाल किले की प्राचीर से ... जबकि उस वक़्त पूरी दुनिया मोदी के भाषण को सुनने के लिए tv पर आंखें गड़ाए हुए थी... उस समय शौचालय जैसी बात नहीं करनी चाहिए थी.. इससे देश अपमानित हुआ.. सवा सौ करोड़ जनता का अपमान हुआ...

एक तरफ आप कहते थे कि दुनिया मे हमारी इमेज सांप सपेरों वाली है जो कि खराब है तो दूसरी तरफ उससे भी ज्यादा अपमानित करने वाली वजह .. आपने दुनिया को बताई.. आपने इसका जिक्र बारंबार किया.. यहां तक कि विदेशों में NRI के द्वारा आयोजित विशाल जनसमूह में भी इस बात का जिक्र किया... विदेशों में भारतीयों की क्या इज्जत रही ? ? वहां के अखबारों ने भारतीय महिलाओं में बारे में ये सब छापा.. वो NRI कहीं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहे..

कौन से मुद्दे , किस मंच से बोलने हैं, इसका भी ज्ञान नहीं ..? शौचालय बनाने के लिए आपने भारत के अंदर अभियान चलाया , अखबारों में वविज्ञापन के माध्यम से, TV के माध्यम से प्रचार किया होता, किसी छोटे मोटे कार्यक्रम में बोलते, मन की बात में बोलते...

लेकिन आप वहां बोलते हैं जहां बाहर वाले आपको तौलने की कोशिश में सुन रहे हैं.. जहां पर भारत की अच्छी इमेज बनाने की आपकी जिम्मेदारी थी.. वहां आपने अपने अहंकार और अज्ञान की वजह से सब गुड़गोबर करके रख दिया...

Sunday, 12 August 2018

क्या दलितों का लालच देश खत्म करने पर आमादा है ?

मुस्लिमों के लिए चाहे कुछ भी किया जाए वो भाजपा को वोट नहीं करते... इसी तरह दलितों के लिए आप कुछ भी करो.. पर उनकी प्राथमिकता में पहले लालू, अखिलेश, माया होगी.. उसके बाद ही भाजपा आती है...
उसी क्रम में देखा जाए तो सवर्ण समाज के लिए सबसे पहले भाजपा ही है.. उसके बाद ही कोई और...

भाजपा देशभक्तों की पार्टी मानी जाती है तो इसके पीछे कारण भी उचित हैं... मुस्लिम और दलित हमेशा अपने नेताओं के माध्यम से देशविरोधी एजेंडे में शामिल हो जाते हैं... भले ही वो इनकार करें... जबकि देशहित के मुद्दे पर भाजपा को सिर्फ सवर्णों का साथ मिलता है...

इसमें भी अगर अंतर करना हो तो सिर्फ इतना कह सकते हैं कि मुस्लिम को देशविरोध के लिए किसी नेता, मौलवी या किसी कारण की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि मुस्लिम होना ही भारतीय संस्कृति और देश का विरोध मान लेना पर्याप्त है.. इस पर कोई चाहे तो बहस कर सकता है..

वहीँ दूसरी तरफ दलितों को समझने के लिए ऐसे समझिये,  मान लीजिए कि....
"आपकी नजर किसी दुकान में रखे हीरे जड़ित जेवर पर है.. आपकी पूरी इच्छा है कि काश ये मेरा होता... अचानक एक आदमी आये और कहे कि भाई.. देखो चारों तरफ.. ना कोई गार्ड है, ना cctv, ना कोई परिंदा... तू दुकान तोड़ के ले सकता है..
किसी ने उकसाया, माहौल मिला और सारी नैतिकता को ताक पर रखकर आप दुकान से "चोरी" करने को हमला कर देते हो... "

दलित यही कर रहे हैं.. कोई आता है और कहता है.. निराश क्यों हो ? तू ये भी ले सकता है, वो भी ले सकता है, इसको भी जेल भेज सकता है. .. और उसको भी.. बस मुझे वोट दो .. मैं उस दुकान (देश) पर हमला करने का माहौल बना दूंगा..
दलित अपने कदम आगे बढ़ा देता है.. लालच बुरी बला है...

आज देश के नेता .. देश के लिए राजनीति नहीं कर रहे.. ना फैसले ले रहे हैं.. वो वोट की राजनीति कर रहे हैं... क्योंकि अगर नहीं करेंगे.. तो दलित या मुस्लिम चोरी ना करने देने के लिए उस पार्टी को वोट नहीं देंगे...
आप चोरी करने दो.. तो ही वोट देंगे... ये अलग बात है इस चोरी को वो अपना "मूल अधिकार" जैसे शब्द देते हैं..

हम भाजपा को भी दोष क्यों दें अगर आज देश की ये स्थिति है.. मान लो कि कोई ऐसी पार्टी आ जाये जो देश हित की बात करता है तो दलित और मुस्लिम वोट नहीं करेंगे, ऐसे में वो हार जाएगी..

समस्या ये भी है कि दलितों का लालच सुनामी की तरह मुंह फाड़े आगे बढ़ता जा रहा है.. वो इसके लिए मुस्लिम जैसे संस्कृति विहीन और लुटेरी कौम के साथ गलबहियां करके सबकुछ मिटा देने पर आमादा हैं... 

खास बात तो ये है, मुस्लिम ... दलितों को साथ लेकर सवर्णों से निपट रहे हैं... देश पर कब्ज़ा करने के लिए राह का रोड़ा सिर्फ सवर्ण है.. वो दलित नहीं जो आए दिन छोटी छोटी मांगों के लिए इस्लाम अपनाने की धमकी देते हैं.. या अपना भी लेते हैं.. उनके लिए धर्म मायने रखती ही नहीं.. वो बहन से भी निकाह कर लेंगे और गौमांस भी खा लेंगे...
तभी तो भीम और मीम का रिश्ता परवान चढ़ रहा है... मीम ने हिन्दू समाज के एक महत्वपूर्ण किले को अपनी ताकत बना लिया है.. हम ये भी कह सकते हैं कि अंबेडकर ने जो पौधा लगाया था वो जहरीला पेड़ बन चुका है...

क्योंकि मुस्लिम को पता है कि एक बार देश पर कब्ज़ा हो जाये तो ये दलित हमारे सामने संघर्ष कर ही नहीं पाएंगे.. आधे तो यूँही इस्लाम स्वीकार कर लेंगे.. और बाकी आधे काट दिए जाएंगे.. पाकिस्तान में कितने हिन्दू दलित हैं ?

अब इसके बाद वर्तमान की चर्चा करें तो मोदी सरकार चार साल में किसी भी मोर्चे पर सफल नहीं दिख रही... लेकिन विचारणीय ये भी तो है कि जब देश के अंदर इस तरह की जनता हो तो कौन सी सरकार सफल होगी ? ?

Wednesday, 30 May 2018

मोदी विरोधियों को मिर्ची लगने वाला लेख

एक भिखारी कहता है कि मैं आज भी 25 साल से भिखारी का भिखारी ही हूँ.. और मोदी बुलेट ट्रेन चलाने की बात करता है.. ।।

हमारे बगल में महतो जी का दुकान है.. बोलते हैं.. आज भी मेरे दुकान की बिक्री ज्यादा नहीं है... और मोदीजी बुलेट ट्रेन चलाने की बात करते हैं... भाई साहब की दुकान में तीन चीजें है.. पान , गुटखा और सिगरेट।।

हमारा जो अखबार देने आता है वो 20 साल से आ रहा है, बोलता है मैं आज भी लखपति नहीं हुआ.. मुश्किल से कमाना और खाना होता है.. और देखिए मोदीजी बुलेट ट्रेन चलाने की बात करते हैं...

अबे मूर्खों... तुम सब अपनी हालात के जिम्मेदार खुद हो... मोदीजी ने मुद्रा लोन योजना शुरू की.. जिससे 12 करोड़ लोगों ने लोन लिया और बिजनेस करके आगे बढ़े...

सुनो .. तुम दिमाग के भिखारी हो.. और भिखारी हमेशा भिखारी रहेगा.. अखबार बेचने वाला कभी अमीर नहीं होता.. पंचर बनाने वाला कभी गाड़ियों का शो रूम नहीं खोलता.. दलदल के ऊपर कोई भी सीमेंट प्रयोग करो.. घर गिर जाता है...

और सुनो.. भिखारियों... मुल्लों के चाटुकारों.. अगर भिखारियों और तुम जैसे रुदन रुदालियों को ध्यान में रखा जाता तो बुलेट ट्रेन तो क्या.. हवाई जहाज भी ना बनते.. क्योंकि तुम तो तब भी रोते ही थे .. कि ट्रेन के टिकट तो खरीदने लायक हम है नहीं.. और ये हवाई जहाज बना रहे हैं...

तुम्हे ध्यान रखकर अविष्कार होता तो साइकिल के आगे आजतक कोई गाड़ी नहीं बनी होती.. तुम्हे ध्यान रखा जाता तो सिर्फ दाल, गेंहूँ का उत्पादन किया जाता.. काजू , अखरोट पिस्ता बादाम नहीं...

तुम्हे ध्यान में रखा जाता तो सिर्फ होम्योपैथिक दवाई बनी होती... एलोपैथिक नहीं.. क्या दुनिया मे तुम्हारे जैसे भिखमंगों के हिसाब से ही विकास किया जाएगा ...?

तुम तो कल तक मोबाइल में इंटरनेट भी प्रयोग नहीं करते थे क्योंकि दो पैसे बचाने थे... तो क्या इंटरनेट का अविष्कार ही गलत हो गया..?

याद रखो.. जीवन में हर चीज हर किसी को मिल सकती है बशर्ते वो उसके लिए पात्रता रखता हो.. सिर्फ किसी "मोदी" की बुराई के लिए अपनी इज्जत क्यों खो रहे हो ?

Thursday, 8 February 2018

नमाज़ें पढ़ो कि हिंदुओं के पक्ष में राम मंदिर का फैसला आये वरना..

अगर आपलोगों ने आज NEWS18 पर आरपार नहीं देखा तो बहुत कुछ MISS कर दिया.. आज TV पर वो सबकुछ हुआ जिसकी मनाही होती है... रिजवान अहमद पूरे फॉर्म में थे... एक बार फिर से उन्होंने लाइव अंसार राजा और ओवैसी के प्रवक्ता को कह डाला कि...

"नमाज़ें पढ़ो नमाज़ें.. कि कोर्ट का फैसला तुम्हारे पक्ष में ना आ जाये वरना हिन्दू तुम्हारे सीने पर कुदाल चलाकर मंदिर बनाएंगे , तुमलोगों की इस देश मे औकात क्या है... अरे दो मिनट में उड़ जाओगे.. बहन जी मायावती के तलवे चाटने वाले... "

अंसार रजा बावला होकर चिल्लाने लगा.. बोला.. दँगा हो जाएगा इसकी बात पर.. रोक लो कोई इसको वरना बवाल हो जाएगा.... उधर वारिस पठान FIR दर्ज करने की मांग करने लगा..

लेकिन आज रिजवान अहमद ने भी ना रुकने की कसम खा रखी थी... इनके माध्यम से सारे ही मुस्लिम जगत को ये सच्चाई बता दी कि अयोध्या में मंदिर के चक्कर मे हिंदुओं को जैसे उकसा रहे हो.. और अगर हिन्दू जाग गया तो.. एक का भी बचना मुश्किल है.. अब मैं क्या कहूँ.. आपलोग खुद ही देखिए इस लिंक पर जाकर और सब्सक्राइब भी कीजिये.. https://youtu.be/wFK-hY3k8Hc

Saturday, 23 December 2017

लालू के पाप का घड़ा फूटा, गए जेल

लालू यादव जेल जा रहे हैं.. अब बिहार की सड़कों पर हंगामा शुरू होगा.. एक चोर के लिए भी ऐसा समर्थन आपको सिर्फ बिहार में ही देखने को मिलेगा... क्योंकि ज्यादातर बिहारियों के लिए चोर, गुंडे, डॉन, भ्रष्टाचारी रोल मॉडल होते हैं... बिहार के युवा इन गिरे हुए चारित्रिक लोगों के जैसा बनना ज्यादा पसन्द करते है... क्योंकि इनके पास अथाह धन भी होता है और अनलिमिटेड पॉवर भी...

ये लालू यादव..तो हज़ारों हज़ार लोगों का हत्यारा भी है... जंगलराज में हुई हत्याओं का सूत्रधार कौन था ? अपहरण उद्योग का बॉस कौन था ? एमसीसी जैसे नक्सलियों के हाथों हज़ारों हत्याएं किसने करवाये थे ? भ्रष्टाचार इनके खून में ऐसा बसा था कि इतने साल बाद जब राजनीति में वापिस आये तो इन्होंने सोचा कि इनको फिर से भ्रष्टाचार के लिए ही वापिस लाया गया .. इसलिए इस बार तो इन्होंने अपने पुत्र, पुत्री, दामाद सबको इस कार्य मे लगा दिया... आख़िर ये कैसा आदमी है ? ?

इसे 3 साल की जगह 30 साल की सजा होनी चाहिए और वो भी इसके लंपट और भ्रष्टाचारी बेटों, बेटियों और दामाद के साथ...

Thursday, 5 October 2017

कोई मुझे भी मोदी विरोधी बना दो भैया..

जो भी हिन्दू होकर मोदीजी के विरोधी हैं.. वो दिमाग से विकलांग हैं... मैं हमेशा सोचता हूँ कि कोई मुस्लिम या वामपंथी अपने तर्कों से मुझे प्रभावित क्यों नहीं कर पाता  ? कोई मुझे क्यों नहीं समझा पाता कि मोदीजी का शासन खराब है ?

बात इतनी सी है कि कुछ मेरे जैसे लोग सच्चाई देख कर मुकर जाए ऐसे संस्कार नहीं हैं... दिमाग से इतने पैदल भी नही हैं कि कोई अपने दिमाग का dustbin मेरे दिमाग मे उड़ेल कर चला जाये... और फिर हम भी उस कचरे का अंश हो जाएं...

आपको बताया था कि एक मुस्लिम दोस्त बराबर मुझे मोदी विरोध या हिन्दू विरोध की पोस्ट भेजता था.. इससे मुझे समस्या नही थी क्योंकि ये सब जानना भी चाहिए कि दुश्मन क्या सोचता है... लेकिन एक दिन उसको जवाब दिया तो बेचारा इस्लाम का मारा facts को बर्दाश्त नहीं कर सका और दोस्ती खत्म हो गयी.. लेकिन उसके बाद एक दिन उसने फिर से रिप्लाई करते हुए इस्लाम को महान बताया.. जैसे 56 इस्लाममिक देश हैं.. तेजी से बढ़ता मजहब है.. आदि आदि... उसके बाद जो मैंने जवाब दिया.. फिर वो तीसरी बार रिप्लाई करने की हिम्मत भी नहीं जुटा सका...

फेसबुक ट्विटर आदि पर और न्यूज़ चैनल तक भी अब हिंदूवादियों के कब्जे में हैं.. या कहिए... ये मैदान जीत चुके हैं... पर व्हाट्सएप्प पर ये लोग अपने जैसे लोग खोजकर msg भेजते हैं और उसमें कुछ नही किया जा सकता...

वैसे जरूरत भी नहीं है... क्योंकि काम दिखता है.. भ्रष्टाचारी दिखते हैं.. सिस्टम में सुधार या बिगाड़ दिखते हैं... देश की सुरक्षा दिखती है... जब हर चीज दिखता है ... और उसके बाद भी आप के दिमाग मे कोई सत्य से परे भर कर चला जाये तो... कोई बात नहीं...

उन्हीं से निपटने के लिए तो हमलोग हैं... :)

Friday, 19 August 2016

कश्मीर के मैदान में अब अजीत डोभाल

अब कश्मीर के मैदान में गब्बर की  ENTRY हो चुकी है। कश्मीर का मामला डोभाल जी को दे दिया गया है। दो सूत्री मार कुटाई की योजना केंद्र सरकार ने पारित कर दी है। अब रक्षा मंत्री , गृह मंत्री कश्मीर मामले में बैक टू पवेलियन हो गए हैं। सीमा पार के घुसपैठ से निपटने के लिए "सख्त" कदम उठाये जाएंगे। ये डोभाल जी वाला "सख्त" है।

⚔ नो टॉलरेंस की नीति..

⚔ बलूचिस्तान के लोगों से संपर्क कर मोदीजी के बयान को वास्तविक रूप देना...

⚔ सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर नयी नीति...

⚔ पाकिस्तानी झंडे लहराने वालों के लिए विशेष कार्यक्रम...
सेना की नयी रणनीति तैयार....

और सबसे आखिर में अमरनाथ यात्रा पर लगाए गए 75000 सैनिकों को कश्मीर में ही रुकने को कहा गया है... .. पता नहीं क्या होने वाला है... अल्लाह खैर करे...

Saturday, 13 August 2016

क्या कश्मीर में आर या पार वाली स्थिति है?



कश्मीर में अब शांति आने वाली नहीं है। वहाँ आजादी की जंग छिड़ी है। आजादी भारत से, आजादी हिंदुओं के शासन से। इसकी वजह मोदीजी भी हैं क्योंकि उनकी नीति कांग्रेस वाली नहीं है। हमें सोचना चाहिए कि भाई ये मुसालमान पाकिस्तान से कश्मीर को मिलाये जाने के पक्ष में क्यों है.... जबकि पाकिस्तान में ज्यादा गरीबी, बेरोजगारी और रोज फटते हुए बम हैं ? ? आखिर सोचिये तो सही कि ऐसा कौन सा जुल्म भारत ने इनके ऊपर किया है .... उल्टा इन्होंने ही लाखों हिंदुओं को मारा काटा रेप किया और विस्थापित किया ?

मुसलमानों का कहना है कि ये उनके मजहब की बेइज्जती है कि उनके ऊपर शासन करने वाला कोई हिन्दू हो, चाहे वो मनमोहन हो या मोदी। इस्लाम में ये डूब मरने वाली बात या पाप होता है कि मुस्लमान किसी काफ़िर के देश में रहे। आखिर पाकिस्तान को जिन्ना ने यह साफ़ कहके माँगा था कि मुसलमान हिंदुओं के साथ नहीं रह सकते। उन्होंने देश का नाम ही "पाक" याने पाकिस्तान रखा कि अब जा के हम पाक हुए याने शुद्ध मुसलमान बने। यही पाक मुसलमान बनने के लिए कश्मीर में सभी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

ये सब मुमकिन था भी.... लेकिन मोदी जी के आने के बाद नामुकिन होता जा रहा है, अलगाववादी नेताओं को ये दिख गया कि इतने सालों से कश्मीर में बिछाए गए नेटवर्क और बनाये गए ताकत का इश्तेमाल नहीं किया तो ये मोदी अंदर ही अंदर सारे नेटवर्क को मिटा देगा और ताकत को इतना कम कर देगा कि एक जुलुस निकालना भी संभव नहीं हो पायेगा, क्योंकि मोदीजी कुछ काम अंदर ही अंदर करते रहते हैं बिना हल्ला किये, इसकी वजह है विपक्षी पार्टियों की अलगाववादियों से सहानुभूति और मीडिया का हाहाकार।


लेकिन इस वक़्त कश्मीर का जो माहौल है वो आर या पार वाला बन चूका है, महीने भर से ऊपर हो चुके हैं, कई थाने जला दिए गए हैं, मिलिट्री कैम्पो पर लगातार अटैक हो रहे हैं, कितने ही थाने पुलिस-विहीन हो चुकी है, सेना अपना आक्रमक रुख खत्म कर चुकी है क्योंकि ये कोर्ट और विपक्षी दलों की मांग है, नतीजा पुरे कश्मीर में अब आतंकियों का कब्ज़ा है, 15 अगस्त के दिन पाकिस्तान दिवस मनाने की जबरदस्त तैयारी चल रही है, पाकिस्तानी झंडे बनाये जा रहे हैं, झंडे लहराने वाले स्थलों का निर्माण पुरे कश्मीर के हरेक मोहल्ले में चालू है.... अब आगे मोदीजी के पास क्या विकल्प है , ये मुझे भी नहीं पता क्योंकि वो भी मीडिया और विपक्षी पार्टियों के जबर्दस्त दवाब में हैं।

Wednesday, 10 August 2016

मेरे घर में घुसे सांप ने मुझे बेघर किया।

एक बार मेरे कमरे में 5-6 सांप घुस गए। मैं परेशान हो गया, उसकी वजह से मैं कश्मीरी हिंदुओं की तरह अपने ही घर से बेघर होकर बाहर निकल गया। इसी बीच बाकी लोग जमा हो गए।  मैंने पुलिस और सेना को बुला लिया। 
अब मैं खुश था कि थोड़ी देर में सेना इनको मार देगी तभी मेनका गांधी आ गयी, बोली नहीं आप गोली नहीं चला सकते, मैं पेटा के तहत केस कर दूंगी। 

सेना वाले उसको ढेला मारने लगे, सांप भी उधर से मुंह ऊँचा करके जहर फेंकने लगे। एक दो सांप ने तो एक दो सैनिक को काट भी लिया पर भागे नहीं। फिर इतने में कुछ पडोसी मुझे ही बोलने लगे, क्या भाई तुम भी बेचारे सांप पर पड़े हो, रहने दो , क्यों भगा रहे हो ? उधर मोदीजी ने खबर भिजवा दिया, सांप को मुंह में जहर नहीं होना चाहिए, उसके मुंह में दूध दे दो तो वो मुंह से जहर की जगह दूध फेंकेगा। ..... मैं हैरान परेशान... फालतू में बात का बतंगड़ हो चूका था। न्यूज़ भी चलने लगे थे। रविश ने कह दिया कि सबको जहर नजर आता है सांप नजर नहीं आता, उसकी भी जिंदगी है।

इसी बीच एक सैनिक ने पेलेट गन चला दिया और एक सांप ढेर हो गया, मुझे आशा जगी, सेना ही कुछ कर सकती है, तभी गुलाम नबी ने कहा, पेलेट गन क्यों चलाया, सांप को कष्ट हो रहा है, अभी कोई कुछ सोचता तब तक हाइकोर्ट का भी फैसला जाने कहाँ से आ गया कि पेलेट गन नहीं चला सकते सांप पर। उधर आम आदमी पार्टी ने कह दिया कि वहाँ जनमत संग्रह हो कि उस घर में सांप रहेगा या आदमी। सांप को जीने का हक़ है इस पर सब एकमत हो गए थे। 

इतने में जो मेरा पडोसी मेरा घर कब्ज़ा करना चाहता था वो सांप के लिए दूध और छिपकली मेढक लेकर आ गया , उसको खिलाने लगा, उसकी मदद मेनका गांधी, ग़ुलाम नबी ने कर दी और पडोसी को शाबाशी दी। 

मैं निराश होकर अब दूर से सिर्फ देखता था। काश मैंने खुद लाठी लेकर शुरू में ही भुरकस निकाल दिया होता तो आज ये दिन ना देखना पड़ता।।

एक रात तो गुजारिये गौरक्षकों के साथ :)

आधी रात के बाद राजस्थान के एक सुनसान गांव के चौराहे पर अंधेरे में वो बाहर निकलता है.

सर्दियों की आहट लिए यह चांदनी के उजाले वाली एक रात है. पूरा इलाक़ा पहाड़ियों और पेड़ों की छाया में डूबा है.

तभी एक दर्जन से ज़्यादा आदमी भूतों की तरह अंधेरे से प्रकट होते हैं.
राजस्थान के इस इलाक़े में जांच पड़ताल करने वाले नवल किशोर शर्मा चिल्लाते हैं, ''आस पड़ोस में किसी गाड़ी की कोई सूचना?''
बाक़ी आदमी सिर हिला देते हैं और उनमें से एक कहता है, ''अभी तक तो कुछ भी नहीं मिला, आज सब कुछ शांत लगता है.''

मोटरसाइकिल पर सवार शर्मा गठीले बदन के आदमी हैं. उनके बाल तेल से चमक रहे हैं और उनकी साफ़सुथरी दाढ़ी है. डेनिम की पैंट और हल्के पीले रंग की शर्ट के साथ ख़ाकी रंग का जूता पहन रखा है. रात होते ही सभी एक एक कर जमा हो जाते हैं, सबका एक मिशन है, गाय की रक्षा।

ये सभी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाते हैं.
इनमें से कुछ तो 15 साल की उम्र तक के हैं. इनमें किसान, दुकानदार, अध्यापक, छात्र, डॉक्टर और बेरोज़गार सभी तरह के लोग शामिल हैं. अगुआई करने वाला शर्मा जी समेत अधिकांश का मानना था कि दादरी की घटना में जिस मुस्लिम आदमी को पीट-पीट कर मार डाला गया उसने वाक़ई में बीफ़ का सेवन किया था और ‘जब लड़ाई होती है तो लोग मरते हैं.’
इन सभी का भरोसा है कि 'गाय माता' ख़तरे में है.

इनमें से एक सूरज भान गुर्जर का कहना था, 'अगर हमने अभी नहीं रक्षा की तो गाय 20 सालों में ही ग़ायब हो जाएगी.'
इसी तरह के मिथकों और जोशो ख़रोश के साथ ये रात-रात भर गाय तस्करों को खोजते फिरते हैं. ये सभी लोग लाठी, डंडो, बेसबॉल बैट, हॉकी, पत्थरों, माचिस और डंडों पर हंसिया लगे हथियारों से लैस होते हैं.

ये लोग गाड़ियों को रोकने के लिए सड़क पर कीलें बिछा देते हैं और अपनी मोटरसाइकिल पर तस्करों का पीछा करते हैं.
गाय को बचाने की यह लड़ाई थोड़ी अव्यवस्थित सी दिखती है. तस्कर अंधेरे में इनकी ओर फ़ायर करते हैं और अक्सर ही उनकी तेज़ रफ़्तार गाड़ियों का पीछा किया जात है.

किसी ने कुछ दूरी पर जलती रोशनी देखी और ये लोग ज़मीन पर झुक गए. जब टिमटिमाती रोशनी बुझ गई तब पता चला कि यह किसी गाड़ी की नहीं थी.
एक और निगरानी ग्रुप ने एक ट्रक को रोका. लोगों में उत्तेजना बढ़ गई और सभी लोग उस ट्रक पर चढ़ गए लेकिन उन्हें हताशा हाथ लगी. इसमें दिल्ली के बाज़ार के लिए सूअर भर कर ले जाया जा रहा था.
ट्रक के ड्राइवर ज़ाकिर हुसैन से इन लोगों ने पूछा, ''तुम एक मुस्लिम हो और सूअर ले जा रहे हो?''
हुसैन ने कहा, ''मैं जीने के लिए हर चीज़ ढोता हूँ.''

इस समूह का दावा है कि उन्होंने अबतक 18 हज़ार गायों को बचाया है. इन गायों को 1992 में शुरू हुई एक गोशाला में रखा गया. इसमें अगर हम आक्रमक नहीं होंगे तो गौहत्यारे भी हत्यारों से लैस होते हैं वो हमें मारने में देर नहीं करते, कई बार गोलियां चलती हैं, हम सड़क पर लेट कर जान बचाते हैं पर छोड़ते नहीं है।

ध्रुव सिंह नाम के एक पुलिसकर्मी कहते हैं, ''गो तस्करी की शिकायतों को हम बहुत गंभीरता से लेते हैं और गाय सुरक्षा दल इसमें हमारी मदद करते हैं.''

दिन में सभी गौरक्षक आजीविका के लिए मेहनत करते है, जागते हैं , बावजूद इसके रात में सभी जान जोखिम में डालकर गौरक्षा का कार्य करते हैं। इसमें वो लोग सफल हुए हैं। किसी किसी दल का दावा है कि उन्होंने एल लाख से ऊपर गायों को बचाया है।

क्या करें हिंदूवादी ? ?

हिन्दू अपने देश में कमजोर हैं..... अब सच तो यही है। पर अब ये नहीं होगा इसकी तैयारी करनी चाहिए।

सबसे सीधा रास्ता है, अपने जैसे लोगों को तैयार करके जबर्दस्त एकता का परिचय देना होगा। हमारी सहायता के लिए कम से कम इस वक़्त ना सरकार है, ना पुलिस, ना नेता, ना कोई जाति समूह, ना दूसरे मजहब के लोग।। विश्वास ना हो तो कश्मीरी हिंदुओं को देख लो, इनके तरफ से कोई नहीं है।

जातिवाद मिटायेंगे, दलितों में हिंदुत्व का भाव जगायेंगे, ये सब फालतू की बात है, ये कार्य हज़ारों साल में नहीं हुआ था, जिन दलितों को या किसी भी जाति को समझदारी होगी वो खुद जुड़ेगा, हम इतना कर सकते है कि भेदभाव नहीं करेंगे। इससे ज्यादा क्या करेंगे ? वैसे भी अब ये सब पुरानी बात है, बस इसे खींचा जा रहा है, मुफ्त की सुविधा और वोट के लिए।

सवर्णो की समस्या है कि वो इस्लाम कभी इस्लाम स्वीकार नहीं कर सकते, जबकि दलितों के सामने ये समस्या नहीं है, वो बौद्ध धर्म में जा सकते हैं तो इस्लाम में क्यों नहीं ? ? तो समस्या ख़ास लोगों को ही है और शुरुआत इनको ही करना पड़ेगा।

जब बात करते हैं शुरुआत की तो लोग डर जाते हैं क्योंकि वो लड़ना नहीं चाहते, घायल होना या संपत्ति का नुक्सान नहीं चाहते, लेकिन वो तो एक दिन होना ही है चाहो या मत चाहो। बावजूद इसके मैं किसी ऐसी लड़ाई की बात नहीं कह रहा, क्योंकि ये वक़्त ऐसी लड़ाई का है भी नहीं। जिस दिन शारीरिक लड़ाई का वक़्त आयेगा उस दिन तो आपको ना चाहते हुए भी हथियार के साथ बाहर कदम रखना पड़ेगा।

फिलहाल लड़ाई मानसिक है, इसको लड़ना पड़ेगा, इस वक़्त वो लोग खुद को मजबूत करने में लगे हैं, क्योंकि उनका लंबा प्रोग्राम एक योजना के तहत चलता है, जैसे कि नए नए मस्जिद बनाना, मोहल्ले बढ़ाते जाना, बाजार के ज्यादातर दूकान खरीदना या किराया पर लेना, सऊदी में किसी सदस्य को भेजकर यहाँ अमीर होना, कट्टरता का विस्तार , आतंकियों का समर्थन और अपने स्तर से सहायता, और इन सबके लिए अपने नेताओं की संख्या राज्यसभा व् लोकसभा में बढ़ाना इत्यादि।

आप क्या कर रहे हैं ? आप भी कीजिये। मंदिरों में दान देते हैं, थोड़ा सा हिन्दू संगठनों को दीजिये, 50 रूपये ही दीजिये, 100 रुप्येही दीजिये। सबसे ज्यादा कमजोर हिन्दू यहीं से है जबकि सबसे ज्यादा अमीर लोग देश में हिन्दू ही हैं। पर कोई धर्म के लिए सही जगह 100 रुपये नहीं देना चाहता। साईं बाबा पर रुपये , सोना चांदी चढ़ाते हो , दंगे में साईं बाबा बचाने नहीं आएंगे। उस वक़्त वो छोटे छोटे संगठन ही बचाने आएंगे जिनको आपने कभी एक रूपया नहीं दिया होगा पर जान की कीमत उनके ऊपर निर्भर होगी।

अभी की लड़ाई सिर्फ ताकत बढ़ाने की चल रही है, इसमें हमसब पीछे है क्योंकि कोई गाइड लाइन नहीं है। अभी से कमाते रहिये, जैसे जी रहे हैं वैसे ही जीते रहिये लेकिन थोड़ा परिवर्तन करने का समय है। अगर भविष्य देख सकते हो तो देखो, तुम्हारे और उनके बीच सिर्फ तुम्हारी 'जनसंख्या' है इसी वजह से उन्होंने कदम रोक के रखे है वो भी अगले 20 साल में बदल जायेगा, फिर ? ? क्योंकि वो तुम्हारी बराबरी में आने का इंतज़ार नहीं कर रहे, वो 50-50 का अनुपात हो ऐसा नहीं चाहते, जिस दिन 30-70 भी आ गया तो लड़ाई सड़कों पर आ जायेगी।