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Friday, 14 July 2017

दंगो में बचने के लिए कौन से हथियार और रणनीति

लगभग हरेक हिन्दू आजकल इस बात पर सहमति बना चुका है कि हिंदुओं के घरों में हथियार होने चाहिए.. कल इसी कड़ी में Tufail Chaturvedi जी ने भी अच्छा पोस्ट किया था। अब तो संशय इस बात पर भी नहीं है कि हथियार रखने चाहिए या नही.. संशय तो यह है कि कौन सा हथियार रखा जाए जिसे रखने से हम सुरक्षित भी हों और कानूनन दंडनीय भी ना हो।।

दोस्तों, क्यों ना आप सिर्फ एक कल्पना करें कि..
"आप घर मे महिलाओं और बच्चों के साथ हैं.. अचानक शोरगुल सुनते हैं और आपको पता चलता है कि करीब 5000 मुसलमान आआपके मुहल्ले में घुस चुके हैं.. अल्लाह हु अकबर के नारों के साथ किसी के सर पर लोहे से मारा जा रहा है, किसी के सर पर ईंट पटक दी जा रही है किसी को बुरी तरह लातों घूंसों से पीटा जा रहा है.. थोड़ी ही देर में महिलाओं के कपड़े तार तार होने लगते हैं.. आप रो सकते हैं, चीख सकते हैं, गिड़गिड़ा सकते हैं.. लेकिन बचा नहीं सकते ...अंततः.. आखिरी दृश्य ये होगा..

1. आप लहूलुहान पड़े हैं.. सामने मां बहन भी जिसकी इज्जत लूटी जा चुकी है।

2. आप आखिरी सांसें गिन रहे हैं.. अंधेरा छा रहा है, आपके सारे सपने खत्म हो चुके हैं. . ये भी याद आ रहा है कि.. कुछ लोग कहते थे कि ऐसा दिन आएगा पर आपने मजाक ही समझा था...

3. आप उस समय मोहल्ले में थे ही नहीं.. जब तक पहुंचे.. पूरी दुनिया बिखर चुकी थी..

4. आप मोहल्ले में थे.. ऐसे समय मे आपने बहुतों को बुलाने की कोशिश की पर आधे एक घण्टे में जब तक हेल्प मिलती .. सब मटियामेट हो चुका था..

हर किसी के साथ  एक अलग ही परिदृश्य होगा ये स्वाभाविक है। लेकिन सबके साथ एक सामान्य बात होगी कि कोई भी विरोध में सक्षम नहीं हो पाया..

मेरे हिसाब से तैयारी कैसी करनी चाहिए..

1. आप अपने मोहल्ले की सही लोकेशन समझ कर ये तय कीजिये कि आपके मोहल्ले से मुस्लिम मोहल्ले की दूरी क्या है ..
2. डंडा, लोहे के रॉड, हॉकी स्टिक आदि तो होने ही चाहिए..
3. कुछ भी पेट्रोल जरूर रखिये.. अगर बाइक है तो बहाना भी हो जाएगा कि आपातकालीन समय के लिए पेट्रोल रखा था..
4. चाकू रखिये लेकिन शायद आपके ही परिवार वाले इसे ना रखने दें क्योंकि हिंदुओं में यही तो मूर्खता है.. तो ठीक है अच्छा उपाय बताता हूँ.. बड़े स्क्रू खोलने के लिए काफी बड़े बड़े और हैवी पेंचकस आते हैं.. वो रखिये...
5. सबसे महत्वपूर्ण बात अपने आसपास के बजरंग दल, विहिप, आरएसएस आदि सारे संगठनों से जाकर मिलिए और नम्बर लीजिये तथा कभी डिस्कस भी कीजिये कि ऐसी स्थिति के लिए क्या निर्देश है ? उनके पास अच्छे विकल्प होते हैं.. क्योंकि वो जिहादियों से बराबर निपटते रहते हैं।
6. महत्वपूर्ण बात जितने ज्यादा लोगों को अपने जैसे  कट्टर हिंदूवादी बना सकते हैं वो बनाइये.. क्योंकि जान लीजिए सिर्फ़ वही लोग आपको मदद के लिए आएंगे..
6. दोस्तों आखिरी बात ज्यादा जोश में ना आये.. फिल्मी प्रभाव में ना पड़िये.. मान लीजिये किसी ने कहा कि "अल्लाह हु अकबर" कहो.. तो कह दीजिये.. कुछ भी बोलने को कहे तो कहिये.. लेकिन आपने उन सबका चेहरा पहचान लिया है.. बड़ा प्रतिशोध लिया जा सकता है.. अगर मर गए तो खेल खत्म हो जाएगा.. जिंदा बच गए तो उसका खेल खत्म हो जाएगा.. और खेल उसका खत्म करना है , अपना नहीं... क्योंकि गलत लोग वो हैं आप नहीं।।

कुल मिलाकर आप अपने हिसाब से सोचिए जैसे मान लीजिये कि आप घेराबंदी या फूलों की क्यारियां लगाने के बहाने लोहे के इस तरह से तार बिछा सकते हैं जिसमे ठीक समय पर विद्धुत प्रवाह किया जा सके.. और घर के आंगन में घुस चुके 30 - 40 लोग जो भी हों वो निकल ही ना सकें...

अब बाकी आप सब खुद समझदार हैं. अंततः याद रखिये दुनिया मे हम हिन्दू ही हैं जिनको मुसलमानों के खिलाफ विजय मिलती आयी है. लेकिन आज जिस तरह से हमारी सोच और रहन सहन है.. उससे तो हम सिर्फ मारे जा सकते हैं.. जल्दी कीजिये.. देर ना हो जाये.. मोदी और योगी जी से उम्मीद मत रखिये... आपके मरने के बाद  आपको दो पैसे देंगे.. इससे ज्यादा कुछ नहीं।

Friday, 10 June 2016

हिन्दू पलायनवादी है इसलिए कैराना और कश्मीर होता है।

अच्छा चलो, मान लो कल मामले के हाईलाइट होने की वजह से अखिलेश सरकार पुलिस का जमघट लगवा देती है कैराना में। दुसरी तरफ मोदी जी भी सेना के जवानो को भेज देते हैं कैराना में। और तो और आरएसएस, बजरंग दल, विहिप आदि के लोग भी पहुँच जाते हैं कैराना में।

सभी हिंदुओं को उनके घर वापिस दिला दिए जाते हैं, उनकी दुकानें वापिस खुलवा दी जाती हैं, आने जाने के रास्ते पर पुलिस खड़ी कर दी जाती है, और इस तरह से कैराना के हिंदुओं को वापिस बसा दिया जाता है।

एक दिन गुजरा, दो दिन गुजरा, सप्ताह गुजरे, महीना भी गुजरा........ तो क्या अब सेना के जवान, पुलिस सब जिंदगी भर वहीँ रहेंगे ? जाहिर है वो चले जाएंगे........ उसके बाद ? ? फिर भाग जाओगे ?.... फिर पुलिस आएगी ? फिर भाग जाओगे.... फिर पुलिस आएगी.... फिर.... फिर....

फिर तो हिंदुओं तुम्हारा पलायनवादी दृष्टिकोण उचित ही है।

कैराना और कश्मीर का जवाब रणवीर सेना के इतिहास से सीखिये

मैं बार बार रणवीर सेना के इतिहास के बारे में बताता हूँ जो आज हिंदुओं की जरुरत है। 90 के दशक में जब नक्सलियों ने याने दलितों और मुल्लों ने चुन चुन कर भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण जैसे अगड़ी जातियों का सामूहिक नरसंहार शुरू कर दिया था। बिहार में हाहाकार मचा था। जो सवर्ण अपने गाँव जाता वो लौट कर नहीं आता था। जो गाँव में थे सब भाग कर शहर आ गए थे। पूरा बिहार कश्मीर और कैराना बन चुका था। अपनों की लाश जलाने के लिए भी गाँव  में जाने की हिम्मत नहीं थी। लाखों एकड़ जमीन परती पड़ी थी। प्रशासन लालू की थी इसलिए सुनने वाला कोई नहीं था। ये वर्ग लालू का वोटर नहीं था इसलिए लालू वामपंथियों के साथ मिलकर इसका नामोनिशान मिटा देना चाहता था।

लेकिन सवर्णों में एक बुजुर्ग ने सीना ठोंका, एक छोटी सी जगह पर कुछ लोगों के साथ बैठक की, और हाथों में हथियार उठाने का संकल्प लिया। इतना अपमान बर्दाश्त ना था। सबसे पहले कुछ सवर्णों ने अपने लाइसेंसी हथियार आगे किये और सहायता दी। इसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन गया। खून की नदी बाह चली। नक्सलियों की क्रूरता भी इनकी क्रूरता के सामने बौनी पड़ गयी। उस वक़्त बिहार सरकार में हाशिये पर गए कई बीजेपी नेताओ का समर्थन मिलना शुरू हो गया। रणवीर सेना का नाम सुनकर बड़े बड़े पुलिस अधिकारीयों के हाथ पाँव फूल जाते थे। मंत्री विधायक सांसदों में खौफ समा गया था।

नक्सली जो कल तक कहीं भी किसी सवर्ण को मारकर निश्चिन्त रहते थे, वो अब एक भी सवर्ण को मारने के पहले दस बार सोचते थे, क्योंकी एक के बदले दस अपने मारे जाएंगे ये तय था। पुरे बिहार में अमन चैन लौट आया। नक्सली वापिस भाग कर बंगाल में घुस गए। लाखों सवर्ण अपने गाँव लौट कर खेती करने लगे। सभी के अंदर गर्व का भाव था, सभी निर्भय हो चुके थे। वह बुजुर्ग आदमी ब्रह्मेश्वर मुखिया लोगों के लिए अवतार बन कर आये।
आज का कोई भी हिन्दू संगठन रणवीर सेना जैसा नहीं। ये भी सच है कि यहां रणवीर सेना की स्थापना तब हुयी जब पानी सर से ऊपर गुजर चूका था और जीने का रास्ता सिर्फ हथियारों से होकर जाता था।

यही एकमात्र तरीका है, कोई पार्टी कोई नेता साथ नहीं देगा। लेकिन जब खड़े होंगे तो मैं आस्वस्त हूँ पूरी दुनिया से समर्थन मिलेगा। हिंसा का जवाब अहिंसा पहले भी कभी नहीं था, ना आज है।