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Sunday, 19 August 2018

मुस्लिम समाज के दुश्मनों पर ही अल्लाह मेहरबान क्यों ?

कुछ मुल्लों ने झूठी तसल्ली हेतु एक पोस्ट डाली कि जिस जिस ने बाबरी मस्जिद गिराई उसके ऊपर अजाब गिर रहा है.. वो दुनिया से रुखसत हो रहे हैं... इसमें उन्होंने वाजपेयी जी का नाम भी जोड़ दिया..

लेकिन वाजपेयी जी को तो इतनी शानदार मृत्यु नसीब हुई.. 93 साल जी कर गए .. जो आजकल कम ही देखने को मिलता है.. फिर 10 सालों से कितनी सेवा मिली.. आराम मिला जो ऐसी हालत में जाने के बाद शायद किसी बुजुर्ग को नसीब होती हो ... फिर अल्लाह ने कौन सा दंड दिया ?
बाबरी गिराने वाले में प्रमुख आडवाणी जी भी टनाटन घूम ही रहे हैं...

2002 में दंगे के समय जिस मोदी जी को अल्लाह का नाम लेकर दुनिया भर के मुस्लिम बद्दुआएं देते हैं.. उसपर तो अल्लाह इतना खुश हो गया.. कि .. सीधे प्रमोशन देते हुए प्रधानमंत्री ही बना दिया ...

कहां है अजाब ? किधर है अल्लाह का दंड ? ये तो उल्टा हो गया है.... बल्कि इस हिसाब से तो ऐसा लगता है कि जिसको मुल्ले सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं .. अल्लाह उसी पर मेहरबान हो जाता है..

Thursday, 22 February 2018

एक हिन्दू लड़की के निकाह की कहानी

एक लड़की थी... शोभा... उसके माँ बाप ने उसकी शादी की सोच रखी थी.. अपनी बेटी की शादी के लिए जैसे तैसे जोड़ तोड़ करके पैसे जमा करते रहे... माँ ने जेवर वगैरह पहनने की जगह सहेज कर सुरक्षित रखना जरूरी समझा... ताकि बेटी की शादी में दे सके... सबकुछ ठीक ही चल रहा था.. इसी बीच एक दिन बेटी गायब हो गयी.. एक हफ्ते बाद खबर आई कि बेटी किसी लड़के के साथ भाग गई है.. और शादी कर चुकी है. ..

और फिर ये भी पता चला कि वो लड़का एक मुसलमान है... अब तो जैसे माँ बाप कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह गए थे...
एक दिन लड़की ने फोन किया...
"पापा.. आप गुस्सा है... क्योंकि मैने गलत कदम उठाया पर हमें स्वीकार कर लीजिए... "

पिता ने कहा..
"बेटी .. तूने अगर भागकर किसी हिन्दू से भी शादी की होती तो घर मे जगह दे देता... पर ये तूने क्या किया... मुसलमान से ?"

"पर पापा पहले तो जिंदगी भर आप मुझसे यही कहते रहे कि सब इंसान एक जैसे होते हैं, सभी एक ही ईश्वर के  बच्चे हैं... हिन्दू मुस्लिम .. एक हैं... बोलिये... और अब आप ये क्या कह रहे हैं ?"

(अब उसके पिता को जैसे लकवा मार गया... अब समझ आया .. उसने अपनी परवरिश में खुद कितनी बड़ी गलती की थी... जिस नैतिक शिक्षा को वह अपना बड़प्पन समझता था... आज वो उसके ही मुंह पर तमाचा बन के लगा था... आखिर चूक उनसे ही हुई थी...)

"हां बेटी.. मेरी ही ग़लती है.. पर क्या तुम इतनी बच्ची थी कि किसी के धर्म मे मौजूद उसके बुराइयों को ना देख सको... ? किसी से शादी के बाद सिर्फ उसका मुंह देखकर जिंदा नहीं रहना होता है.. बल्कि उसके समाज के नियम कानूनों को अपनाकर जिंदा रहना होता है.. जो तुम्हे कुछ दिनों में समझ आने लगेगा"

फोन काट दिया गया...

समय फिर से बीतता रहा.. मां बाप की जिंदगी जैसे नरक बन गयी थी.. हर आदमी उपहास उड़ाता... परिवार में ही कितने थे जो मुंह पर जहरीली बातें बोल जाते थे.. कहीं किसी समारोह आदि में जाते तो देखते कि... लोग उनकी तरफ इशारा करके आपस मे हंसते और बातें करते... कुछ तो ऐसी जगहों पर भी "मुझे दुख हुआ जानकर" बोलते और शर्मसार करते... धीरे धीरे दोनों ने ऐसी जगहों पर जाना ही बन्द कर दिया...

लेकिन अपमानित होना तो जैसे अब जिंदगी का हिस्सा था.. कोई मिलता तो समाज में पूछे जाने वाले ये प्रश्न हमेशा पीछा करते ... आपके कितने बच्चे है... क्या करते हैं.. बेटी है ?... अच्छा तो शादी कहां हुई ..?

सिर्फ 1 साल बाद बेटी से फिर बात हुई... रोते हुए बोली...

"पापा...आप सही थे... इधर की जिंदगी बिल्कुल अलग है... मुझे बचा लीजिये... 3 - 4 महीने बाद ही मेरा नाम बदलने के लिए टॉर्चर किया.. मार पीट की.. अब.. अब मेरा नाम कुछ और है... दिन रात पर्दे में रहने को कहते हैं.. पर्दे में ही बाहर जाने को क़हते हैं... पापा ये लोगों का समाज एक जंगल जैसा है.. यहां घरों में ना कोई बहन है ना कोई... बहू... मैं क्या करूँ ? पापा आपने जिंदगी में कभी क्यों नहीं बताया कि मुसल्मान हिंदुओं के जैसे नहीं होते..   कभी इनकी सच्चाई क्यों नहीं बताई ?"

"और जिन्होंने तुम्हे सच्चाई बताई थी.. उसकी बात मानी थी?"

(अब बेटी को याद आ रहा था कि जब भी कुछ लोगों ने ऐसा बताया तो कैसे उनसे उनको पिछड़ा हुआ कह कर  लड़ती थी.. उल्टे अपमानित करती थी...)

"पापा अब क्या... करूँ ..?"

"जब तुमने निकाह किया तो मुझसे नहीं पूछा... अब क्यों ? "

बेटी उस दिन फोन पर बहुत देर तक रोती रही... और सुबकते हुए बोली..
"मैं माफी के लायक तो नहीं हूं.. पर माफ कर देना"

अगले दिन पता चला.. बेटी ने आत्महत्या कर ली है...

पर पिता खुश था...

क्योंकि बेटी ने जहर अकेले नहीं खाया था.. उसने सबको बराबर सजा दी थी.. अपने पति को... अपने उस सास ससुर को... भी... कुल सात लोग उस घर मे मरे पड़े थे..

Friday, 19 January 2018

अगर पाकिस्तान नहीं बनता तो आज हिन्दू नहीं होते

कुछ हिंदूवादी इस बात पर बहुत रोते हैं कि भारत का विभाजन हो गया.. पाकिस्तान बन गया.... लेकिन अगर पाकिस्तान नहीं बनता तो क्या आज यहां हिन्दू जीवित होते ? सिर्फ विभाजन को लेकर जब मुसलमानो ने भारत में चारों तरफ दंगे शुरू किये थे तब गली गली में हिंदुओं की लाशें बिछा दी थीं.. (इसमें दलित भी थे)...
कभी सोचा है आपने 1947 से अबतक उनकी जनसंख्या क्या हो गयी होती ? ?
1947 में भी ये बची खुची जनसंख्या ही थी... जो आज मुसीबत बन गयी है...
जब उसी वक़्त विभाजन के पहले इन्होंने अपनी असलियत दिखा दी थी ... लाखों हिंदुओं को मार डाला था.. तो उसी वक़्त हिंदुओं को इतनी दूरदृष्टि हो जानी चाहिए थी कि आगे जा के फिर क्या होने वाला है ? ये तो कहना ही पड़ेगा कि हिन्दू इस मामले में एक मुर्ख संप्रदाय है।

आज वो थोड़े से लोग जब ज्यादा हुए तो कश्मीर लिया, बंगाल लिया, केरल लिया, और यूपी, बिहार की बारी है... ये सच्चाई है, इसको नकारना सच से मुकरना है... ये थोड़े से लोग ? ? लेकिन अगर आज पुरे पाकिस्तान के लोग यहां होते तो ? सारे बड़े आतंकी नेटवर्क भारत में होते, बड़े बड़े डॉन यहीं होते...विश्वप्रसिद्ध आतंकवादी भारत में होते... ना जाने कितने लीडर और शायद pm भी वही होते तो क्या लगता है आपको आज हिन्दू यहां होते ? बचे होते क्या ? मुझे तो नहीं लगता... शायद अस्तित्व खत्म हो गया होता... उसी हाल में होते जैसे पाकिस्तान में हैं.. एक्का दुक्का... याने हिंदुओं का पन्ना खत्म हो गया होता.. अरे आज जब ये थोड़े से बचे हुए मुस्लिम नहीं सम्भलते तो पूरे पाकिस्तान के यहां घुसे होने की स्थिति में क्या होता ? ?

विभाजन गलत था.. लेकिन हिंदुओं के अस्तित्व के लिए एक मौका भी था.. जैसे उधर पाकिस्तान में हिंदुओं को खत्म कर दिया गया वैसे ही इधर हिंदुओं को भी वैसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी... ये मौका था.. बहुत कम उनकी जनसंख्या थी... आजादी के बाद से ही निपटना शुरू करते तो अबतक शायद कहानी खत्म हो गयी होती...

मेरे हिसाब से तो विभाजन हिंदुओं को तात्कालिक रूप से नयी जिंदगी दे गया... और ये मुसलमानों के लिए बड़ी बेवकूफी थी.. क्योंकि अगर उन्होंने विभाजन नहीं किया होता तो आज पूरा भारत उनके हाथों में होता और एक इस्लामिक राष्ट्र होता।