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Sunday, 22 April 2018

मुसलमानों को अभी रोक लो वरना कुछ नहीं बचेगा

मेरा स्पष्ट मानना है कि हिन्दू कभी भी मुस्लिम कौम के साथ नहीं रह सकती... ये तेल और पानी का मिश्रण है.. इतिहास तो जो है वो है.. वर्तमान में भी यही सच है... ऐसा इसलिए क्योंकि आप मुस्लिमों को ऐसे किसी भी काम से रोक नहीं सकते जो हिंदुओं में बिल्कुल ही त्याज्य है... और सारे फसाद की वजह यही है...

जैसे कि आप उनको गाय ना काटने के लिए राजी नहीं कर सकते...
वो आपके भगवान या किसी आस्था पर विश्वास करें या इज्जत करें... ये भी नहीं हो सकता...
वो जिहाद के उपक्रम में हिन्दू लड़कियों को निशाना ना बनाएं ये भी असम्भव है..
वो हिंदुओं को काफ़िर ना मानें तो वो मुसलमान ही नहीं कहलायेंगे...
वो जनसँख्या जिहाद करके हिंदुओं से ऊपर निकलने की कोशिश नहीं छोड़ सकते..
मुसलमानो का नेता हमेशा वही होगा जो हिंदुओं के खिलाफ काम करेगा.. और हिंदुओं का नेता हमेशा उनका प्रमुख दुश्मन होगा...
वो हमेशा दुश्मन देश के प्रति वफादार रहेंगे.. क्योंकि भारत एक काफिरों के जनतंत्र वाला देश है..
ये अलग घर चाहते हैं, अलग मोहल्ले चाहते हैं, अलग गांव शहर और राज्य चाहते हैं..
इनका पहनावा, रहन सहन सब अलग है और रहेगा...

सवाल है कि जब इतने सारे अंतर हैं तो घुलना मिलना सम्भव कैसे है ? ना विचार मिलते हैं ना कार्यकलाप ? क्या सिर्फ "मुंहजबानी एकता" के भरोसे चलते रहेंगे ?

ये ठीक है कि ये लोग इतने अंदर तक जड़ें जमा चुके हैं कि मुस्लिम मुक्त भारत जैसे विचार हास्यास्पद लगते हैं... परन्तु ये सच है कि जहां आप 20 करोड़ मुस्लिमों को हटाने के बारे में  निराश हो जाते हैं वहीं ये लोग हिन्दू मुक्त भारत बनाने के लिए दिन रात प्रयत्नशील है .. पूरी उम्मीद के साथ.. और इसका नतीजा है.. हर दिन... बहुत सारे स्थानों से हिंदुओं का पलायन...

इसके लिए ये लोग जो तरीके अपनाते है  उसका कोई तोड़ नहीं है.. याने लव जिहाद और जनसँख्या जिहाद...
संविधान के अनुसार इसे रोका नहीं जा सकता और हिन्दू इतने जागरूक नहीं है... 18% से जिस दिन 40 %होंगे.. जो कि होना ही है उस दिन तीसरा तरीका अपनाएंगे.. "डायरेक्ट एक्शन".. जो बंगाल केरल आदि में हो रहा है.. इसके बाद मामला हाथ से निकल जायेगा.. क्योंकि उस वक़्त ये अपने ही एक- दो करोड़ लोगों की बलि चढ़ा देने से हिचकेंगे नहीं.. और ये काम हिंदुओं के लिए नामुमकिन है... 

अब रास्ता क्या है ? रास्ता एक ही है.. और सिर्फ यही है.. आज के आज जागो और 18% पर ही एक्शन लो.. क्या करना है.. कैसे रोकना है.. और हमेशा के लिए आने वाले खतरे से निजात पाना है.. उसपर सोचो और कार्य करो..

Thursday, 22 February 2018

एक हिन्दू लड़की के निकाह की कहानी

एक लड़की थी... शोभा... उसके माँ बाप ने उसकी शादी की सोच रखी थी.. अपनी बेटी की शादी के लिए जैसे तैसे जोड़ तोड़ करके पैसे जमा करते रहे... माँ ने जेवर वगैरह पहनने की जगह सहेज कर सुरक्षित रखना जरूरी समझा... ताकि बेटी की शादी में दे सके... सबकुछ ठीक ही चल रहा था.. इसी बीच एक दिन बेटी गायब हो गयी.. एक हफ्ते बाद खबर आई कि बेटी किसी लड़के के साथ भाग गई है.. और शादी कर चुकी है. ..

और फिर ये भी पता चला कि वो लड़का एक मुसलमान है... अब तो जैसे माँ बाप कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रह गए थे...
एक दिन लड़की ने फोन किया...
"पापा.. आप गुस्सा है... क्योंकि मैने गलत कदम उठाया पर हमें स्वीकार कर लीजिए... "

पिता ने कहा..
"बेटी .. तूने अगर भागकर किसी हिन्दू से भी शादी की होती तो घर मे जगह दे देता... पर ये तूने क्या किया... मुसलमान से ?"

"पर पापा पहले तो जिंदगी भर आप मुझसे यही कहते रहे कि सब इंसान एक जैसे होते हैं, सभी एक ही ईश्वर के  बच्चे हैं... हिन्दू मुस्लिम .. एक हैं... बोलिये... और अब आप ये क्या कह रहे हैं ?"

(अब उसके पिता को जैसे लकवा मार गया... अब समझ आया .. उसने अपनी परवरिश में खुद कितनी बड़ी गलती की थी... जिस नैतिक शिक्षा को वह अपना बड़प्पन समझता था... आज वो उसके ही मुंह पर तमाचा बन के लगा था... आखिर चूक उनसे ही हुई थी...)

"हां बेटी.. मेरी ही ग़लती है.. पर क्या तुम इतनी बच्ची थी कि किसी के धर्म मे मौजूद उसके बुराइयों को ना देख सको... ? किसी से शादी के बाद सिर्फ उसका मुंह देखकर जिंदा नहीं रहना होता है.. बल्कि उसके समाज के नियम कानूनों को अपनाकर जिंदा रहना होता है.. जो तुम्हे कुछ दिनों में समझ आने लगेगा"

फोन काट दिया गया...

समय फिर से बीतता रहा.. मां बाप की जिंदगी जैसे नरक बन गयी थी.. हर आदमी उपहास उड़ाता... परिवार में ही कितने थे जो मुंह पर जहरीली बातें बोल जाते थे.. कहीं किसी समारोह आदि में जाते तो देखते कि... लोग उनकी तरफ इशारा करके आपस मे हंसते और बातें करते... कुछ तो ऐसी जगहों पर भी "मुझे दुख हुआ जानकर" बोलते और शर्मसार करते... धीरे धीरे दोनों ने ऐसी जगहों पर जाना ही बन्द कर दिया...

लेकिन अपमानित होना तो जैसे अब जिंदगी का हिस्सा था.. कोई मिलता तो समाज में पूछे जाने वाले ये प्रश्न हमेशा पीछा करते ... आपके कितने बच्चे है... क्या करते हैं.. बेटी है ?... अच्छा तो शादी कहां हुई ..?

सिर्फ 1 साल बाद बेटी से फिर बात हुई... रोते हुए बोली...

"पापा...आप सही थे... इधर की जिंदगी बिल्कुल अलग है... मुझे बचा लीजिये... 3 - 4 महीने बाद ही मेरा नाम बदलने के लिए टॉर्चर किया.. मार पीट की.. अब.. अब मेरा नाम कुछ और है... दिन रात पर्दे में रहने को कहते हैं.. पर्दे में ही बाहर जाने को क़हते हैं... पापा ये लोगों का समाज एक जंगल जैसा है.. यहां घरों में ना कोई बहन है ना कोई... बहू... मैं क्या करूँ ? पापा आपने जिंदगी में कभी क्यों नहीं बताया कि मुसल्मान हिंदुओं के जैसे नहीं होते..   कभी इनकी सच्चाई क्यों नहीं बताई ?"

"और जिन्होंने तुम्हे सच्चाई बताई थी.. उसकी बात मानी थी?"

(अब बेटी को याद आ रहा था कि जब भी कुछ लोगों ने ऐसा बताया तो कैसे उनसे उनको पिछड़ा हुआ कह कर  लड़ती थी.. उल्टे अपमानित करती थी...)

"पापा अब क्या... करूँ ..?"

"जब तुमने निकाह किया तो मुझसे नहीं पूछा... अब क्यों ? "

बेटी उस दिन फोन पर बहुत देर तक रोती रही... और सुबकते हुए बोली..
"मैं माफी के लायक तो नहीं हूं.. पर माफ कर देना"

अगले दिन पता चला.. बेटी ने आत्महत्या कर ली है...

पर पिता खुश था...

क्योंकि बेटी ने जहर अकेले नहीं खाया था.. उसने सबको बराबर सजा दी थी.. अपने पति को... अपने उस सास ससुर को... भी... कुल सात लोग उस घर मे मरे पड़े थे..

Thursday, 17 August 2017

लव जिहाद की असली दोषी हिन्दू लड़कियाँ..

मैं तो हिन्दू लड़कियों की मूर्खता पर लिखना ही नहीं चाहता क्योंकि ये मेरे लिए ही शर्मनाक होगा पर कभी कभी लिखना चाहिए.. आज चारों तरफ फिर से लव जिहाद का डिबेट चालू है.. अब कोर्ट ने भी मान लिया कि लव जिहाद एक सच्चाई है.. अब कोई कहता है इस्लाम दोषी है तो कोई सरकार को फेलियर कहता है..

पर सच पूछो तो इसमें सबसे बड़ी दोषी हिन्दू लड़कियां है .. इनको समझाना मतलब पैदल चांद पर जाना है.. एक तो इनका जवाब सुनो तो सिर्फ फिल्मी डायलाग मारती है..
"तुमलोग आपस मे लड़वा रहे हो ... तुमलोग ही दंगा करवाते हो.. तुमलोग ही वोट के लिए ऐसे करते हो आदि आदि"

और खुद ? ? एक तरफ कृष्ण पूजा का नाटक और दूसरी तरफ गौभक्षकों के साथ घूमना ? एक तरफ शिवपूजा और दूसरी तरफ नंदी के हत्यारों के साथ ? ?

ये लड़कियों को इस्लाम की abc भी पता नहीं है.. मुसल्मानों के जिहादी चेहरे को देख नहीं पाती.. इनको सिर्फ दिखता है. .. जीन्स पेंट टीशर्ट घड़ी.. बाइक और कार.. चुपके से पानी लगा लगा के बाल सँवार के लाइन मारते लड़के..
क्योंकि हिन्दू लड़कियां बददिमाग है और लालची हैं.. इनके रोल मॉडल सिवाय बॉलीवुड के भांड हीरोइनों को छोड़कर और कोई होता ही नहीं. इनको दिन रात  बस ये बॉलीवुड गाना तो वो बॉलीवुड गाना.. बस.. इससे ज्यादा हो गया तो फिर tv सीरियल... इनके मां बाप भी कभी इस्लाम की सच्चाई नहीं बताते.. इन लड़कियों को धार्मिक संस्कारों की जगह बॉलीवुड का संस्कार मिलता है.. जितने उपदेश फिल्मों में दिये जाते है.. ये भी बहस होने पर उतना ही बोलती है।

इन तक सच्चाई नहीं जा रही है.. हिंदुओं के लिए उनके घर की लड़कियां ही धर्म की सबसे कमजोर कड़ी है।।  ये लोग धार्मिक होने की नौटंकी तो खूब करती है लेकिन धर्म मिटाने वालों के साथ दोस्ती रखती है.. आज जब हिंदुओं में जागरूकता आ रही है तब भी ये लोग अपनी ही दुनिया मे व्यस्त हैं.. कारण ये है कि माँ बाप इनसे घर के अंदर DEBATE नहीं करते.. और लड़कियों को एक उम्र के बाद समझाया नहीं जा सकता क्योंकि तबतक ये बहुत काबिल बन जाती हैं .. थोड़ी सी बड़ी हुई नहीं कि बोलेगी..
"ये मेरी जिंदगी है.. तुम कौन होते हो बोलने वाले कि मैं क्या करूँ ?"

और ऐसा तो ये आपको ही नही अपने बाप और मां को ही बोलने लगती है.. यही लड़कियां मुल्लों के घरों में सौतन के साथ गौमांस पका रही है और isis में भेजी जा रही है..

में तो एक सुझाव दूंगा जो लड़कियां बड़ी हो गयी वो तो काबिल बन चुकी है सुनेंगी नहीं इसलिए कम से कम जो आज आपके घर में छोटी बच्चियां है उसको धार्मिक जानकारी दीजिये और सेकुलरिज्म वाला कथा पाठ मत सुनाइये... इस्लाम से नफरत सिखाइये.. मुल्लों से नफरत सिखाइये.. क्योंकि गंदी चीजों से आप प्रेम करना सिखाएंगे क्या ? नहीं तो कल आपको ही शर्मिंदा होना पड़ेगा जैसे हमलोग आज हैं।।