कल सारे डिबेट शो में जिस तरह से कश्मीर में हुए सीजफायर के निर्णय पर भाजपा प्रवक्ताओं की ऐसी तैसी हुई... जैसी बेइज्जती हुई... उसे देखकर मुझे भी बहुत दुख हुआ..
आज से सिर्फ दो साल पहले तक यही सुशील पंडित, यही रिटायर्ड फौजी और रक्षा विशेषज्ञ मोदीजी की तारीफ करते नहीं अघाते थे.. और सिर्फ यही क्यों.... हम सभी राष्ट्रवादियों को एक उम्मीद थी... कि कुछ तो होगा.. कोई ना कोई तो ऐसा फैसला... या ऐसी रणनीति अपनाएगी कि 1990 से चली आ रही इस समस्या का समाधान होगा।।
अगर पूर्ण समाधान नहीं भी निकला तो कम से कम मोदीजी इन कश्मीरी मुस्लिमों को सबक सिखाएंगे. .. उतनी ही पीड़ा देंगे... जितना वो हमारे देश को देते हैं...
लेकिन कुछ नहीं हुआ.. बल्कि इतनी बेशर्मी से घुटने टेक दिए गए कि हम जैसे भाजपा के समर्थकों का सर नीचे कर गया. ...
आज इसमें कोई बुराई नहीं कि भाजपाई प्रवक्ताओं का बलात्कार किया जाए... और मोदी राजनाथ आदि की आलोचना इसलिए किये जायें ताकि इन लोगों को ग्लानि हो.. सर नीचे झुक जाए. ...
चार साल को हलवा समझ के लपेट लिए बाकी एक साल जलेबी समझ के लपेटेंगे,. और चुनाव में जब परिणाम सामने आएंगे तो पता चलेगा कि सब अनपच हो गया है...