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Sunday, 14 January 2018

रोहित सरदाना ने मदरसों के जिहादी किताबों के नाम बताए

आज रोहित सरदाना ने tv पर उन जिहादी किताबों के नाम भी बता दिए.. जिनको पढ़ाकर मदरसों में आतंकवादी बनाया जाता है... और जिन किताबों के नाम बोलने की हिम्मत tv पर किसी प्रवक्ता में नहीं थी...

25 अगस्त 1985 में इजराइल के प्रधानमंत्री बिगिन इजिप्ट की यात्रा पर गए और वहां के प्रधानमंत्रि अनवर सादात से कहा...
"मैं आपके उपर कैसे भरोसा कर लूं... जिसके देश मे कुरान पढ़ाई जाती है.. "

और फिर मानना पड़ेगा अनवर सादात को जिन्होंने के उसके बाद शिक्षा मंत्री को बुलाया और ऐसी सारी आयतों को निकालने का हुक्म दिया जिसमें काफ़िर शब्द आता हो या जिसमे गैर मुस्लिमों से नफरत घृणा और हत्या का पाठ था...

यही नहीं मिस्र ने एक ऐसे विश्वविद्यालय को ही सरकार के अधीन कर लिया जिसमे से इस्लामिक विद्वान तैयार होते थे और कई इस्लामिक किताबें निकलती थी... पाठ्यक्रम से काफ़िर आदि शब्द निकालते हुए वो "आख़िरत" का अध्याय भी निकाल दिया गया जिसमें दोजख का डर दिखा कर मुसलमानों को आतंकी बनाया जाता है...

खैर हम तो यही कहेंगे अगर भारत देश को बचाना है तो वसीम रिजवी .. जिन्होंने मदरसों में आतंकवाद की बात उठाई है.. और रोहित सरदाना ने न्यूज़ चलाई है उसकी आड़ में बड़े कदम उठाए... सबसे बड़ी बात ऐसा करने से ही भाजपा भी हमेशा के लिए जिंदा रहेगी... और हिन्दू भी... नेतन्याहू से मिलने से कुछ नहीं होगा.. उनकी तरह बहादुर बनकर इस्लाम के खिलाफ कदम उठाना होगा।।

Thursday, 11 August 2016

एक सेक्युलर प्राणी की क्लास

एक sick-ular मिल गया आज... बोलने लगा वही रटा रटाया डायलाग....
"अरे भाईजी सारे मुसालमान ऐसे नहीं है, जो अनपढ़ है, सिर्फ वो गलत रास्तों पर चल रहे हैं..

मैने कहा...
"भाईजी.... सड़क पर कभी देखा है कि जो अनपढ़ है वो फुटपाथ पर नहीं बल्कि सड़क के बीच मोटरगाड़ियों के साथ चल रहे हो ? ?"

"हैं जी.... नहीं... ऐसा नहीं देखा...."

"तो ये सब चोंचले है, सिर्फ उनको बचाने का... जब वो किसी पर गोली चलाते हैं तो क्या अनपढ़ होने की वजह से उनको ये ज्ञान नहीं होता कि ये मर जायेगा ? इसका परिवार अनाथ हो जायेगा ? "

"लेकिन अनपढ़... को इससे क्या मतलब...."

"ठीक है कुरआन में लिखा है कि गैर मुस्लिम को मारो.... है ना ??"

"अह.... हाँ लिखा है ..."

"अगर लिखा है ... और वो अनपढ़ है तो उसने कुरआन पढ़ा कैसे ? ?"

"हैं जी.... ये तो... किसी दूसरे ने पढ़ के समझा दिया होगा.. मौलवी मौलाना...."

"तो आप तो खुद मान रहे हो कि मौलवी मौलाना पढ़ा लिखा है, अनपढ़ नहीं है और आतंकवादी तैयार करता है... फिर क्यों कहते हो कि अनपढ़ लोग ऐसा करते हैं ..."

"हाँ लगता तो है पर...

"पर क्या... मदरसे में पढ़ाई ही होती है ना ? किताब कॉपी, ब्लैकबोर्ड, सब होते हैं वहाँ.. पूरी टेक्नोलॉजी का इश्तेमाल कर रहे हैं, झंडे पर दीवाल पर वो क्या क्या लिखते है... तो क्या अनपढ़ लिखता है ये सब ? अनपढ़ का मतलब समझाओ मुझे... फिर ... सवसे पढ़ा लिखा ये लोग खुद मानते थे कि जाकिर नाइक है फिर वो भी आतंकवादी कैसे निकला ? "

"हैं जी.... हैं जी.... वो ... अच्छा चलता हूँ। "