Monday, 22 August 2016

डीएनए जांच में मुसलमानो के पूर्वज हिन्दू निकले

हालाँकि ये मुस्लिम भाइयों के लिए बड़ा शर्मनाक है लेकिन कुछ समय पहले एक बहुत बड़ा तथ्य छुपा लिया गया, पर बावजूद इसके सिर्फ एक वेबसाइट ने इसे प्रकाशित कर दिया था। मुस्लिम खुद चाहे जो कहें लेकिन वैज्ञानिकों ने मुसलमानो का डीएनए सैंपल लेकर चेक किया, इसके लिए भारत सहित आसपास के इस्लामिक देशों के मुसलमानो का भी डीएनए लिया गया। यहाँ तक कि ओरिजिनल मुस्लिम का खिताब पाए अरबी मुसलमानो का भी सैंपल लिया गया और
शोध के बाद साबित हुआ कि सारे मुस्लमान के जीन्स हिन्दुओ से ही निकले हैं ...

लखनऊ के एसजीपीजीआई के वैज्ञानिकों ने फ्लोरिडा और स्‍पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए अनुवांशिकी शोध के बाद निष्कर्ष निकाला कि मुसलमानों के जीन्स भी हिन्दुओं के ही हैं.....

शोध लखनऊ, रामपुर, बरेली और कानपुर जैसे शहरों के करीब 2400 मुसलमानों और हिंदुओं पर किया गया था।

अमेरिका की फ्लोरिडा अंतरराष्‍ट्रीय यूनिवर्सिटी के डिर्पाटमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंस के डॉ. मारिया सी टेरेरोस, डेयान रोवाल्ड, रेने जे हेरेरा, स्‍पेन की यूनिवर्सिटी डि विगो के डिपार्टमेंट ऑफ जेनटिक्स के डॉ.ज़ेवियर आर ल्यूस और लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई के अनुवांशिकी रोग विभाग की प्रोफेसर सुरक्षा अग्रवाल और डॉ. फैजल खान ने शिया और सुन्नी मुसलमानों के जीन पर लंबे शोध के बाद यह निष्‍कर्ष निकाला है कि दोनों के जीन्स वही हैं जो हिन्दुओं के..

रिसर्च में पता चला कि प्रदेश के शिया और सुन्नी मुसलमान और हिंदुओं के जीन में कोई अंतर नहीं है। इतना ही नहीं विज्ञानियों ने तुलनात्मक अध्ययन में भारतीय हिंदुओं, अरब देशों, सेंट्रल एशिया, नॉर्थ ईस्ट अफ्रीकी देशों के मुसलमानों के जीन के बीच भी किया तो पाया कि भारतीय मुसलमानों के जीन भारतीय हिंदुओं से पूरी तरह मेल खाते हैं।

हालांकि इस शोध से उन मुसलमानों को बहुत धक्का लग सकता है जिनका मानना है कि वो डायरेक्ट अल्लाह के पैदा किये हुए हैं ... इस न्यूज़ को शातिर तरीके से छुपाया गया, क्योंकि इससे इस समाज की भारी बेइज्जती होती है।

Friday, 19 August 2016

कश्मीर के मैदान में अब अजीत डोभाल

अब कश्मीर के मैदान में गब्बर की  ENTRY हो चुकी है। कश्मीर का मामला डोभाल जी को दे दिया गया है। दो सूत्री मार कुटाई की योजना केंद्र सरकार ने पारित कर दी है। अब रक्षा मंत्री , गृह मंत्री कश्मीर मामले में बैक टू पवेलियन हो गए हैं। सीमा पार के घुसपैठ से निपटने के लिए "सख्त" कदम उठाये जाएंगे। ये डोभाल जी वाला "सख्त" है।

⚔ नो टॉलरेंस की नीति..

⚔ बलूचिस्तान के लोगों से संपर्क कर मोदीजी के बयान को वास्तविक रूप देना...

⚔ सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर नयी नीति...

⚔ पाकिस्तानी झंडे लहराने वालों के लिए विशेष कार्यक्रम...
सेना की नयी रणनीति तैयार....

और सबसे आखिर में अमरनाथ यात्रा पर लगाए गए 75000 सैनिकों को कश्मीर में ही रुकने को कहा गया है... .. पता नहीं क्या होने वाला है... अल्लाह खैर करे...

Wednesday, 17 August 2016

देश बड़ा या धर्म ? ?

आज हमारे ग्रुप में एक भाई ने सवाल कर दिया कि देश बड़ा है या धर्म ? इस पर बहुत लोग उलझन में पड़ गए। किसी ने देश कहा और किसी ने धर्म। अगर मुझसे ये सवाल आज से 5 साल पहले पूछा गया होता तो देश बोलने में 1 सेकण्ड नहीं लगाता पर आज मैं 'धर्म' बोलने में देर नहीं करूँगा।

देश.... क्या है देश ? ? जब तक आप इस देश में है, जबतक आप इस देश में सुरक्षित हैं, तभी तक तो है ये आपका देश। देश तो ये तब भी कहलायेगा जब कोई इस देश पर कब्ज़ा कर ले और आपको भगा दे....... लेकिन तब ये देश उस आक्रमणकारी का होगा, आपका नहीं। मतलब साफ है जब तक देश में आपका राज है तभी तक देश आपका है।

देश बचता है धर्म से। जिस मजहब के लोगों के पास एक भी देश नहीं था उसने सिर्फ धर्म पर अडिग रहकर 52 देश बना लिए (सवाल ये नहीं कि उनका मजहब ख़राब था या अच्छा)। जिसने धर्म से ज्यादा राष्ट्रीयता को महत्त्व दिया उसके हाथ से देश निकल गया। हमारे हाथों से पाकिस्तान के रूप में, अफगानिस्तान के रूप में देश का बड़ा भाग क्यों निकला ? क्योंकि हम धार्मिक कम सेक्युलर ज्यादा हो गए। अगर हिन्दु कट्टर होते, अड़ जाते ... लड़ जाते कि जान जायेगी लेकिन दूसरे धर्म के लोगों को नहीं देंगे अपनी जगह तब पाकिस्तान नहीं बनता।

कैराना, कांधला, अलीगढ, आसाम, कश्मीर आदि क्यों हिंदुओं के हाथ से निकला, क्योंकि उनके लिए देश पहले था धर्म नहीं, नतीजा धर्म भी गया और देश(स्थान) भी गया। अब दो सवाल है....

1. क्या पाकिस्तान में "हिन्दू धर्म" है.... ? ?
2. क्या पाकिस्तान हमारा देश रहा ? ?

याने देश भी गया और धर्म भी गया...

क्यों गया ? क्योंकि भारत की तरफ से गांधी नेहरू जैसे एक जमात ने धर्म छोड़कर सेकुलरिज्म अपनाया। जबकि जिन्ना ने सिर्फ अपने धर्म का बात कहा, देश भी माँगा धर्म के आधार पर माँगा, खून किया सब धर्म के लिए। नतीजा उनका धर्म बचा ही नहीं बल्कि बढ़ा और साथ में देश भी पाया।

हिन्दू उल्टा करते हैं, देश के नाम पर धर्म छोड़ देते हैं, धर्म छोड़ते ही कमजोर हो जाते हैं और इनके हाथ से धर्म तो जाता ही है, देश भी निकल जाता है। मेरा पक्ष यही है इस सवाल पर, आपका सहमत होना जरुरी नहीं।

Monday, 15 August 2016

"सनातन सुरक्षा संघ" की शुरुआत की है, आप आएंगे ?

बहुत सारे दोस्त बहुत समय से कह रहे थे कि मुझे whatsapp ग्रुप बनाना चाहिए तो ठीक है, फिलहाल ग्रुप का नाम है, "हिन्दू सुरक्षा संघ"। एक  भाई का सुझाव है "सनातन सुरक्षा संघ"।
आपकी क्या राय है ?
फिलहाल मैं सबको add कर लूंगा, लेकिन कुछ शर्तें निम्न हैं।
1. वहाँ भाषा की मर्यादा होनी चाहिए।
2. जो फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट होते हैं उसे वहाँ शेयर ना करें, अगर कुछ ऐसी चीज़ आपने देखी जो अबतक वायरल नहीं हुई तभी पोस्ट करें।
3. 50 रुपये महीने की मदद इस संगठन में होना चाहिए। इतना तो अब कदम हमें उठाना ही चाहिए, ये आपका ही अकाउंट है ऐसा समझना।
4. यहाँ हमसब योजना बनाएंगे, और कार्यान्वित कैसे करें इसी पर बात करेंगे।
5. आपस में कभी नहीं लड़ेंगे। बस मतभेद को दूर करेंगे।
6. ग्रुप का कोई भी आदमी अगर आपके इलाके में है और कुछ मदद चाहिए तो जरूर करेंगे।

7. दलित भाइयों के लिए इस ग्रुप में पूरी तरह स्वागत है और वो भी बाकी लोगों की तरह..... बस उनको अपना अम्बेडकरवाद और पूर्वाग्रह छोड़कर आना पड़ेगा।
8. कोई किसी के नंबर पर कॉल नहीं करेगा अगर बहुत जरुरी ना हो।

इस तरह से एक बड़े अभियान की छोटी सी शुरुआत कर दी गयी है। 50 रुपये मात्र की सहायता के लिए सभी तत्पर भी है। कुछ खुद आगे आकर ज्यादा अंशदान की बात भी कर चुके हैं । आप सभी का स्वागत है। आप घर बैठे कुछ करना चाहते हैं सिर्फ 50 रुपये महीने देकर तो हमारे साथ आइये।

बिहार की ट्रेन में बहन बेटियों के साथ सावधान रहे

बात  2009 की है जब मैं पटना से अपने घर 'गया' जाने के लिये ट्रेन चढ़ा.. रात के 8 बज रहे थे.. मेरे साथ साथ हज़ारो लफंगो की भीड़ उसी ट्रेन मे चढ़ी . .. जो डेली बेसिस पर काम करने वाले जवान लड़के थे...पटना से गया के बीच बहुत सारे गांव है. जहां से ये लोग हर दिन पटना आते हैं फिर वापिस रात को लौट जाते हैं।

जहां मैं बैठा था वहीं एक दादी जी अपनी पोती के साथ बैठी थी जो करीब 11 साल की होगी .. जैसे ही ट्रेन चली..दो तीन लड़के उस दादी जी के पास चले गये..खड़े हो गये.. और एक लड़के ने जिस ने मूह मे एक किलो गुटखा ठूंस के रखा था.. वो एक चाइना का मोबाइल निकाला और अश्लील भोजपुरी गीत को बजाने लगे .. सारे लड़के मजे ले रहे थे...छेडखानी का इतना घिनौना रूप आपको सिर्फ बिहार मे मिल सकता है और कहीं नही। हैरानी की बात थी की पूरी ट्रेन मे अच्छे लोग जिनको बुरा लग रहा था वो चुप थे .. उनमे एक मैं भी था .. वजह? हम अच्छे लोग कुछ की सँख्या मे थे.. और कोई भी  एक दूसरे की हेल्प करने वाले नही थे जबकि उसकी छेडखानी मे एकता थी.. पूरी बॉगी के लड़के उसके साथ थे।।

आखिर मे एक दादा जी टाइप के आदमी ने बोला "बेटा.. घर मे तुम्हारे भी माँ बहन है.. "... इसके बाद .. एक ने सीधा  बोला.. "चुप रहा चचा ना तो उठा के फेंक देवो ".. और बाकी लड़के हंसने लगे.. ट्रेन चलती रही.. वो बुढ़िया दादी  चुपचाप अपनी बच्ची की खातिर चुप हो कर सफर करती रही.. एक से बढ कर एक अश्लील भोजपुरी गाने सुनती रही.. वो सारे लड़के गाहे बगाहे लड़की को छुने का प्रयास करते रहे .. दादी बचाती रही.. कहीं railway की पुलिस नही थी.. 

 

पटना से जहानाबाद तक पूरी ट्रेन इनके क़ब्ज़े मे थी..आप बोलेंगे किसी ने कुछ किया क्यूं नही? जवाब है कि रेलवे लाइन में अगर कोई कुछ बोलता है तो तुरंत सारे लड़के पूरी ट्रेन मे एक जगह जमा हो जाते हैं और पीट ते हैं.. ट्रेन से नीचे फेंककर  मार भी डालते हैं.. यही नही अगर आप ने उसको पीट दिया तो वो लोग अपने गांव फोन कर देते हैं फिर जैसे ही 
उनका गांव का स्टेशन आता है वहा गांव के 200 - 300 लोग लाठी ले कर डब्बे मे घुस जाते हैं और फिर उस आदमी को उतार कर मारते हैं ... ये सब वहा की रोज़ की घटना है...धीरे धीरे एक के बाद एक स्टेशन आते गये ... लफंगो की भीड़ कम होती गयी और लगभग जहानाबाद आते आते 75 % भीड़ लफंगो वाली निकल चुकी थी.. अब देखिये हैरान करने वाली बातें .. अचानक से मुझे खिड़की के बाहर रेलवे पुलिस नज़र आने लगी.. एक दो टी टी ई भी नज़र आ गये..पटना से इस स्टेशन तक किसी भी माँ के लाल मे हिम्मत नही की वो टिकेट चेकिंग भी कर सके..पूरी पुलिस फोर्स मे हिम्मत नही की किसी डब्बे मे आ कर किसी को रोक सके.. . रेलवे प्रशासन को मालूम है...... जब सारे बेटिकट वाले लोफर उतर जाते हैं। तब इनकी हरकत गरीबो पर पैसे वसूल ने की शुरु होती है .. उसी वक़्त जिस दादा जी ने विरोध किया था उनके बगल के एक आदमी उनको ही डांट ने लगते हैं..
"बाबा ई उमर मे जहो तनी मणि सर पर बाल बचल हउ ना वोहू चल जैतो ... समझ ला ?"

वो एक भयानक रात थी.. और ऐसी रात हर दिन होती है मैं कई दिनो तक सोया नही.. उस बच्ची को घेर कर टॉर्चर करने वाली तस्वीर घूमती रही..
जब पुलिस टी टी ई सब ऑलरेडी जान ही रहे थे तो  मैं कहा शिकायत करता ?..खैर एक बात बोलूंगा.. बिहार मे जाओ तो बहन बेटियों के साथ सफर मत करना और रात मे तो बिल्कुल नही ...
(ये पोस्ट मैंने 2013 में NBT पर लिखा था)

सिर्फ 12 साल का बलिदानी जिसे कोई नहीं जानता

बाजी राउत के पिता का नाम हरी राउत था। बाजी अपने घर की पांचवीं सन्तान थे। वह छोटी उम्र में कुशल नाविक की भांति नाव चलाता था। मछली पकड़ना उसने अपने पिता से सीखा था और यही उसके परिवार का व्यवसाय भी था। लेकिन जैसे ही वह कुछ जानने और समझने लायक हुआ, पिता का आश्रय उसके सिर से उठ गया। इसी समय अंगुल, ढेंकनाल और आस-पास के क्षेत्रों में अंग्रेजों का विरोध तेजी से हो रहा था।

11 नवम्बर 1938 को बाजी अपनी नाव से मछली पकड़ रहा था। इसी दौरान कुछ अंग्रेज सिपाही आए और उससे कड़क आवाज में ब्राह्मणी नदी पार कराने को कहा। वे लोग कुछ ग्रामीण आंदोलनकारियों को मारकर भाग रहे थे। सिर्फ 12 साल के बाजी ने अंग्रेजों के लिए चप्पू चलाने से मना कर दिया। किसी धमकी का कोई असर नहीं हुआ।

अंग्रेजों ने गुस्से में आकर उन्हें गोली मार दी। महज 12 साल की उम्र में देश के लिए वो शहीद हो गए। इतिहास में इन्हें सबसे कम उम्र का बलिदानी माना जाता है। दुःख की बात है कि इनके गाँव में आज भी बिजली पानी सड़क आदि की कोई अच्छी सुविधा नहीं है।

Sunday, 14 August 2016

क्या आप हिंदुत्व की रक्षा के लिए 50 रुपये भी दान करेंगे

सभी कहते हैं धरातल पर कब हिंदुत्व के लिए कुछ करोगे ? सिर्फ फेसबुक पर लिखने से क्या होगा ? गौसेवा  में अगर किसी जगह आदमी की जरुरत है पैसे की जरुरत है तो कौन करेगा ? किसी जगह कोई हिन्दू भाई मुसीबत में फंसा है तो मदद कौन करेगा ? किसी को मुसलमानो ने या सेक्युलर सरकार ने गलत आरोप लगाकर फंसा दिया तो जमानत कौन लेगा ? ? ऐसी कई समस्याएं हैं जो सिर्फ फेसबुक से तो हल नहीं होती ...
लेकिन अब इसका जो सबसे बड़ा पक्ष है वो है पैसा... ।।



मुस्लिम समाज में ऐसे ही काम के लिए अफरात पैसे आते हैं, जिसे जकात कहते हैं, सऊदी से, पाकिस्तान से, ईराक से, और खुद भारत का हर मुसलमान का नियम बंधा है वो कुछ भी रकम देगा चाहे 50 रूपया हो या 20 रूपया। फिर उसी से वो अपने भाइयों को थाने से, अदालत से निकालते है, हथियार खरीदते हैं, मस्जिद बनाते हैं, मोहल्ले को सुरक्षित करते हैं, धर्मप्रचार करते हैं, धर्मप्रचार करने वाले मौलाना मौलवी को लिखने के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट देते हैं तो पढ़ने के लिए किताबें देते है और उनकी यात्रा का खर्च उठाते हैं, सबकुछ करते हैं, कुछ तो जो अमीर मुस्लिम होते है वो दिल खोल कर पैसे देते हैं।

अब मेरे भाइयों आपलोग सोचना कि जब वो लोग इस तरह से धरातल पर कब्ज़े के लिए इतना करते है तो हमलोग उनके सामने कुछ भी नहीं हैं, हमलोग इसी वजह से पिछड़ जाते हैं, आज अगर मैं कहूँ कि एक अकाउंट में सिर्फ 20 रुपये दो तो आपलोग आधे तो अनफ्रेंड हो जाओगे, आधे जवाब नहीं देकर मरणासन्न हालात में कोपभवन में चले जाओगे, ज्यादातर तो पढ़ेंगे पर डर से like नहीं करेंगे। (ये मेरे फेसबुक पेज की पोस्ट है इसलिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल है)

क्योंकि हम हिन्दू जलनशील स्वाभाव के हैं, सभी सोचेंगे कि
1. लो शुरू कर दिया पैसा कमाने का धंधा..
2. मैं क्यों दूंगा पैसा, पता नहीं पैसा कहां जाएगा
3. पैसे से खुद  मौज उड़ाएगा, 
4. आईडिया अच्छा है, क्यों ना पैसे कमाने के लिए मैं भी ऐसा ही करूँ
5. हे भगवान्, ऐसे तो ये बहुत पैसा कमा लेगा यार.. इसको आगे नहीं निकलने देना चाहिए। 
6. ये सब बकवास है, सबकुछ सोशल मीडिया से ही हो जायेगा, इतने धनवान मंदिर है, कहाँ कुछ होता है ? इत्यादि।

ये आपकी सोच है और इसका मुझे पूरा पता है, आपका एक एक पैसा कैराना और कांधला में छूट जायेगा दूकान जमीन सहित, लेकिन आप 20 रूपये दोगे नहीं। आप 500 रुपये के बड़े बड़े भगवान के फोटो फ्रेम करके लगा लोगे लेकिन 50 रुपये कोई मांगे तो तुरंत उसी पल से आप उसे हिन्दुवादी से भिखारी की श्रेणी में रख के व्यवहार करोगे।

आज जो आपलोग इस्लाम के बारे में इतना डट के बोलते हो और कुरआन, हदीश की बातें जानने लगे हो वो आपकी मेहनत से नहीं है, आप तो कुरआन पढ़ ही नहीं सकते, मैं जानता हूँ इसका जनक कौन है, और ये भी जानता हूँ कि उर्दू अरबी फ़ारसी सहित कई भाषाओं के जानकार उस बुजुर्ग विद्वान का कंप्यूटर दो साल से खराब है। उसने तो बड़े बड़े हिन्दुवादियों से मदद मांगी पर एक रूपया नहीं मिला। हमारे कई हिन्दू भाइयो को अखिलेश और नितीश ममता के राज में यूँही पकड़ लेते हैं, उनको कौन छुड़ाएगा ? ? परिवार तो इसके दौड़ेंगे मगर आप और हम उसकी मदद नहीं कर सकते ? अगर सबने 50 - 50 रुपये भी महीने के दिए हैं तो हम उसे 2000 या 5000 रुपये भेज सकते हैं। कुछ भी मदद कीजिये। ऐसे बैठे बैठे सबकुछ हाथों से निकल जायेगा। साध्वी प्रज्ञा जी के लिए हमारे एक भाई दौड़ते हैं, कोर्ट में हम उनको हरेक अदालती तारीख पर 1 हज़ार तो दे सकते हैं ?

पूर्वाजो का धर्म था भिक्षा देना

भाइयों ये समय है जब कुछ करना होगा जिसके असर नजर आये। मोदीजी प्रधानमंत्री है, वो आपके धर्मरक्षा के साथ उसके धर्मरक्षा से भी बंधे हुए हैं, मज़बूरी है, आप आगे आओ, और महीने के 50 रुपये कम से कम दो। इसका सारा हिसाब किसने कितना दिया और कहाँ खर्च हुआ वो खुलेतौर पर मेरे ब्लॉग्स पर दर्ज रहेगा।
आजकल ऑनलाइन पैसे भी आराम से मोबाइल से ही ट्रांसफर होते हैं। या जैसे भी करो। फिलहाल मैं उस बुजुर्ग के लिए कम्यूटर लेना चाहता हूँ जिसने पूरी दुनिया में इस्लाम की सच्चाई पहली बार खोली। अकाउंट नंबर दे रहा हूँ।
samir kumar, SBI, ac no. 30029424684,
IFSC CODE- IFSC= SBIN0009007,
Branch- Purani Godown, Gaya (bihar)
Email- samirarty2k@gmail.com

(चूँकि कोई भी अकाउंट पुरे देश के ब्रांच में किसी भी कार्य के लिए समस्या नहीं देती तो मुम्बई में रहकर मैं इसी अकाउंट का प्रयोग करता हूँ।)

और हाँ ये मदद सिर्फ मेरे जानकारी पर नहीं होगी, आपके आसपास भी जरुरत होगी तो पैसे भेजे जाएंगे। खुद कभी आपको जरुरत लगी तो वहाँ भी पैसे जाएंगे। कोशिश करने में क्या हर्ज है। 50 ना सही 20 ही रुपये सही, अब आपके मन में वही सब आ रहा होगा जो ऊपर छह पॉइंट मैंने लिखे ?

आपकी बात जानता हूँ आप सब मदद करना चाहते हो पर सड़क पर जाकर लाठियां नहीं खाना चाहते, नौकरी छोड़ कर जाना नहीं चाहते और इसलिए मैं ये विकल्प दे रहा हूँ कि घर बैठे जो कर सकते हैं वो करते हैं, वो भी बिना खतरा उठाये।